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प्याज उत्पादन में गिरावट, सरकार और किसानों के बीच बढ़ी तनातनी

नई दिल्ली: एक्सपोर्ट बैन के बाद अब प्याज के उत्पादन में गिरावट एक संभावित चिंता की ओर इशारा कर रही है। इससे किसानों और सरकार के बीच तनातनी में वृद्धि हो रही है। प्याज के उत्पादन के तीसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, उत्पादन में कमी आने की संकेत मिल रही है, जिससे दामों में वृद्धि हो सकती है और सरकार को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। प्याज के उत्पादन में गिरावट के आंकड़े स्पष्टता से बता रहे हैं कि आने वाले दिनों में इस संकट में वृद्धि हो सकती है, जिससे प्याज के दाम बढ़ सकते हैं। सरकार ने प्याज के दामों को नियंत्रित करने के लिए सभी उपायों को अपनाया है, लेकिन नए आंकड़ों के साथ उत्पन्न होने वाली स्थिति के बाद भाव को लेकर उत्पन्न चुनौतियों में कमी के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।

कुछ किसान दल सरकार के रूख से नाराज हैं। वो इसे एक दोहरा रवैया कह रहे हैं, उनके अनुसार जब दाम घट जाते हैं तो सरकार कार्रवाई नहीं करती है, लेकिन बढ़ते हैं तो सरकार हस्तक्षेप करती है। किसानों का कहना है कि सरकार उन्हें अधिक दाम मिलने से रोक रही है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूती से नहीं रह पा रही है। अगर आंकड़ों की बात करें तो साल 2022-23 के तीसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, एक ही साल में प्याज का रकबा 2 लाख 1 हजार हेक्टेयर घट गया है। जबकि उत्पादन में रेकॉर्ड 15 लाख टन की गिरावट आई है। सूत्रों का कहना है कि अब सरकार प्याज उत्पादन के नए क्षेत्र तलाशने में जुटी हुई है।

साल 2021-22 के दौरान देश भर में 19,41,000 हेक्टेयर क्षेत्र में प्याज की खेती हुई थी, जो 2022-23 के तीसरे अग्रिम अनुमान में घटकर सिर्फ 17,40,000 हेक्टेयर रह गई है। यानी एक ही साल में प्याज की खेती का रकबा रेकॉर्ड 2 लाख 1,000 हेक्टेयर कम हो गया है। किसानों का कहना है कि दाम की कमी की वजह से वो खेती कम कर रहे हैं। अगर उन्हें अच्छा दाम ही नहीं तो फिर वो क्यों इस फसल की खेती जारी रखें? कब तक वो घाटा सहते रहेंगे और लोन लेकर मरते रहेंगे?  

केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार साल 2021-22 के दौरान देश भर में 3,16,87,000 मीट्र‍िक टन प्याज का उत्पादन हुआ था। जबकि 2022-23 के तीसरे अग्रिम अनुमान में इसका उत्पादन सिर्फ 3,01,88,000 मीट्र‍िक टन रह गया है। यानी एक ही साल में उत्पादन 14,99,000 मीट्र‍िक टन घट गया है। उत्पादन में यह कमी सरकार के बफर स्टॉक से डबल है। किसानों का कहना है कि अगर सरकार अपने फैसलों से उन्हें ऐसे ही दबाती रही तो अगले साल प्याज की खेती में और कमी आएगी।

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