Site icon Krishi Pitaara

अगेती मटर की खेती से कम समय में बढ़ेगी आमदनी

Cultivation of early-maturing peas

नई दिल्ली: अगेती मटर की खेती किसानों के लिए कम अवधि में अतिरिक्त आमदनी हासिल करने का एक उपयोगी विकल्प बन सकती है। मटर की मांग सब्जी के रूप में वर्षभर बनी रहती है, जबकि इसकी कुछ अगेती किस्में लगभग 50 से 60 दिनों में तैयार हो जाती हैं। ऐसे में किसान कम समय में फसल लेकर खेत को अगली खेती के लिए खाली कर सकते हैं।

अगेती मटर की खेती क्यों है फायदेमंद

मटर देश में उगाई जाने वाली प्रमुख दलहनी फसलों में शामिल है। इसकी हरी फलियों का उपयोग सब्जी के रूप में किया जाता है, जबकि सूखे दानों से दाल तैयार की जाती है। अगेती मटर की खेती का प्रमुख लाभ यह है कि फसल जल्दी तैयार हो जाती है और बाजार में शुरुआती आवक के समय किसानों को अपनी उपज बेचने का अवसर मिलता है। अगेती खेती के लिए सितंबर के अंतिम सप्ताह से अक्टूबर के मध्य तक का समय उपयुक्त माना जाता है। हालांकि बुआई का सही समय स्थानीय मौसम और क्षेत्र की जलवायु के अनुसार तय करना चाहिए।

अगेती मटर की प्रमुख किस्में

अगेती खेती के लिए आजाद मटर-3, काशी नंदिनी, काशी मुक्ति, काशी उदय और काशी अगेती जैसी किस्मों का उपयोग किया जाता है। इन किस्मों की खासियत कम अवधि में तैयार होना है। सामान्य परिस्थितियों में इनसे लगभग 50 से 60 दिनों में फसल प्राप्त की जा सकती है। कम अवधि की वजह से किसान एक ही कृषि वर्ष में खेत का बेहतर उपयोग कर सकते हैं। मटर की फसल जल्दी समाप्त होने के बाद उपलब्ध समय के अनुसार दूसरी फसल की बुआई भी की जा सकती है।

मटर की खेती के लिए कैसी होनी चाहिए मिट्टी

मटर की खेती के लिए दोमट और हल्की दोमट मिट्टी को उपयुक्त माना जाता है। खेत में जल निकास की अच्छी व्यवस्था होना जरूरी है, क्योंकि खेत में पानी जमा रहने से पौधों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है। बुआई से पहले खेत की अच्छी तरह तैयारी करनी चाहिए। सबसे पहले मिट्टी पलटने वाले हल से जुताई करने के बाद दो से तीन बार कल्टीवेटर चलाकर मिट्टी को भुरभुरी बनाया जा सकता है। खेत को समतल करने के बाद ही बुआई करना बेहतर रहता है।

बीज की मात्रा और बुआई की तैयारी

अगेती मटर की बुआई के लिए सामान्यतः प्रति हेक्टेयर लगभग 80 से 100 किलोग्राम बीज की आवश्यकता पड़ सकती है। बीज की मात्रा किस्म, बीज के आकार और बुआई की विधि के अनुसार कुछ कम या अधिक हो सकती है। बीज को बोने से पहले बीज उपचार करना भी महत्वपूर्ण है। इससे बीज से फैलने वाले रोगों से फसल को शुरुआती अवस्था में बचाने में मदद मिल सकती है। इसके लिए कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार अनुशंसित बीज उपचारक का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

पौधों के बीच रखें उचित दूरी

अगेती मटर की खेती में सामान्यतः कतार से कतार की दूरी लगभग 30 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 6 से 8 सेंटीमीटर रखी जा सकती है। उचित दूरी रखने से पौधों को पर्याप्त हवा, प्रकाश और पोषक तत्व मिलते हैं तथा खेत में फसल का बेहतर विकास होता है।

खेत की तैयारी के समय खाद और पोषण प्रबंधन

मटर की अच्छी पैदावार के लिए खेत में पर्याप्त जैविक खाद और आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध होना जरूरी है। खेत की तैयारी के समय प्रति हेक्टेयर लगभग 20 से 25 टन अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा मृदा परीक्षण के आधार पर नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की मात्रा निर्धारित करना अधिक उचित रहेगा। सामान्य अनुशंसा के अनुसार प्रति हेक्टेयर 40 किलोग्राम नाइट्रोजन, 60 किलोग्राम फास्फोरस और 50 किलोग्राम पोटाश का प्रयोग किया जा सकता है। हालांकि उर्वरकों की वास्तविक मात्रा मिट्टी की उर्वरता, पिछली फसल और स्थानीय कृषि परिस्थितियों के आधार पर कृषि विशेषज्ञों की सलाह से तय करनी चाहिए।

कम समय में खेत हो जाता है खाली

अगेती मटर की सबसे बड़ी विशेषताओं में इसकी कम अवधि में तैयार होने वाली फसल होना शामिल है। लगभग 50 से 60 दिनों में फसल तैयार होने के कारण किसान समय रहते खेत को अगली फसल के लिए खाली कर सकते हैं। इससे उन किसानों को विशेष लाभ मिल सकता है जो एक ही खेत में वर्ष के दौरान अलग-अलग फसलें लेकर अपनी खेती की उत्पादकता बढ़ाना चाहते हैं।

बाजार में शुरुआती मांग का मिल सकता है लाभ

अगेती मटर की खेती में बाजार का समय भी महत्वपूर्ण होता है। जब शुरुआती दौर में हरी मटर की आवक सीमित रहती है, तब इसकी मांग बनी रह सकती है। किसान स्थानीय बाजार, मंडी, थोक खरीदार या सब्जी विक्रेताओं की मांग को ध्यान में रखकर बुआई का समय तय कर सकते हैं। हालांकि मटर की कीमत मौसम, आवक, स्थानीय मांग, गुणवत्ता और बाजार की स्थिति के अनुसार बदलती रहती है। इसलिए केवल संभावित कीमत के आधार पर खेती का निर्णय लेने के बजाय स्थानीय बाजार की स्थिति का भी आकलन करना चाहिए।

अगेती मटर से कैसे बढ़ सकती है आमदनी

अगेती मटर की खेती में कम अवधि में फसल प्राप्त होने के साथ खेत के दोबारा उपयोग का अवसर मिलता है। यदि किसान अच्छी किस्म का चुनाव, समय पर बुआई, संतुलित पोषण, उचित सिंचाई और रोग-कीट प्रबंधन करता है, तो उत्पादन को बेहतर किया जा सकता है। मटर की फसल के बाद दूसरी उपयुक्त फसल लेने से एक ही खेत से वर्षभर में अधिक उत्पादन प्राप्त करने की संभावना बनती है। इस तरह अगेती मटर किसानों के लिए फसल विविधीकरण और अतिरिक्त आमदनी का विकल्प बन सकती है।

खेती से पहले इन बातों का रखें ध्यान

अगेती मटर की खेती शुरू करने से पहले किसान को अपने क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी, सिंचाई की सुविधा और बाजार की मांग को ध्यान में रखना चाहिए। प्रमाणित स्रोत से अच्छी गुणवत्ता वाला बीज लेना भी जरूरी है। साथ ही खाद, उर्वरक और बीज उपचार की मात्रा स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विशेषज्ञ की अनुशंसा के अनुसार तय करना अधिक सुरक्षित रहेगा। उचित प्रबंधन के साथ अगेती मटर कम अवधि में तैयार होने वाली ऐसी फसल बन सकती है, जिससे किसान अपने खेत और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकते हैं।

ये भी पढ़ें: गन्ने के साथ सरसों और मधुमक्खी पालन से बढ़ाएं कमाई

Exit mobile version