चंडीगढ़: पंजाब में पराली को लेकर किसानों की सोच में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जो पराली पहले बेकार समझी जाती थी, अब वही किसानों के लिए कमाई का जरिया बनती जा रही है। खासकर गेहूं की पराली के बेहतर प्रबंधन के चलते इसे जलाने की घटनाओं में कमी लाने की कोशिशें तेज हो गई हैं।
मशीनों से आसान हुआ प्रबंधन
खेतों में अब आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। कंबाइन मशीन के साथ बेलर और रैकर जैसी मशीनें पराली को इकट्ठा कर बंडल बना देती हैं। इससे पराली को संभालना और बाजार तक पहुंचाना आसान हो गया है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय मिल रही है।
पशुओं के चारे के रूप में बढ़ी मांग
गेहूं की पराली पशुओं के लिए उपयोगी चारा साबित हो रही है। इसकी मांग बढ़ने से किसान अब इसे बेचकर अच्छी आमदनी कर रहे हैं। इससे पशुपालकों को भी सस्ता चारा मिल रहा है और किसानों को नया आय स्रोत मिला है।
बदलती सोच से नया रास्ता
किसानों के बीच अब यह समझ बढ़ रही है कि पराली कचरा नहीं, बल्कि संसाधन है। कई किसान अब पराली को सुरक्षित रखने के लिए गोदाम भी बना रहे हैं, जिससे भविष्य में इसका बेहतर उपयोग किया जा सके।
चुनौती अभी भी बाकी
हालांकि पराली जलाने की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। पिछले साल भी कई मामलों में पराली जलाने की घटनाएं सामने आईं। हालांकि जागरूकता बढ़ने से इसमें धीरे-धीरे कमी आ रही है, लेकिन अभी और प्रयास की जरूरत है।
सरकार का सहयोग
सरकार द्वारा किसानों को सब्सिडी पर मशीनें उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे वे पराली का बेहतर प्रबंधन कर सकें। इसके लिए बड़े स्तर पर निवेश भी किया गया है, ताकि पर्यावरण को नुकसान से बचाया जा सके।
पर्यावरण और किसानों दोनों को फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मशीनों का उपयोग और जागरूकता बढ़ती रही, तो पराली जलाने की समस्या काफी हद तक खत्म हो सकती है। इससे जहां पर्यावरण को लाभ होगा, वहीं किसानों की आय भी बढ़ेगी। पंजाब में खेती का यह नया बदलाव भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत दे रहा है।
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