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महाराष्ट्र के कपास किसानों के लिए CCI खरीद अवधि बढ़ाने की मांग

Cotton farmers of Maharashtra

मुंबई: महाराष्ट्र के कपास किसानों को संभावित आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए राज्य सरकार ने केंद्र से अहम हस्तक्षेप की मांग की है। मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने केंद्रीय वस्त्र मंत्री Giriraj Singh को पत्र लिखकर कपास सीजन 2025-26 के लिए सरकारी खरीद की अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कहा है कि Cotton Corporation of India (CCI) ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर कपास खरीद की अंतिम तिथि 27 फरवरी 2026 तय की है, जबकि राज्य में अब भी बड़ी मात्रा में किसानों की कपास बिना बिके पड़ी हुई है।

खरीद बंद होने से गिर सकते हैं दाम

सीएम ने चेतावनी दी है कि यदि तय समय पर सरकारी खरीद बंद हो जाती है, तो खुले बाजार में कपास के दामों में तेज गिरावट आ सकती है। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने मौजूदा हालात को देखते हुए खरीद की अवधि 30 अप्रैल 2026 तक बढ़ाने की मांग की है, ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए पर्याप्त समय मिल सके और बाजार में कीमतों पर दबाव कम हो।

अप्रैल तक जारी रहे सरकारी खरीद

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय से आग्रह किया है कि CCI को निर्देश जारी कर कपास सीजन 2025-26 की खरीद प्रक्रिया अप्रैल के अंत तक जारी रखी जाए। उनका कहना है कि यह कदम महाराष्ट्र के लाखों कपास उत्पादक किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए जरूरी है।

इतना तय है कपास का MSP

खरीफ मार्केटिंग सीजन 2025-26 के लिए केंद्र सरकार ने मध्यम रेशे वाली कपास का MSP 7,710 रुपये प्रति क्विंटल और लंबे रेशे वाली कपास का MSP 8,110 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। सरकार ने इस सीजन में MSP में बढ़ोतरी जरूर की है, लेकिन बाजार की मौजूदा स्थिति किसानों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है।

शुल्क मुक्त आयात से बढ़ा दबाव

कपास किसानों को इस सीजन में एक और चुनौती का सामना करना पड़ा। सितंबर के अंत से 31 दिसंबर 2025 तक सरकार ने कपास के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दी थी। कुल 11 शुल्क हटाए जाने से बड़ी मात्रा में विदेशी कपास भारत आया, जिससे घरेलू बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ गया। हालांकि सरकारी खरीद से किसानों को कुछ राहत मिली है, लेकिन यदि खरीद की अवधि नहीं बढ़ाई जाती है, तो किसानों को एक बार फिर कम दाम पर कपास बेचने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। ऐसे में अब सबकी नजर केंद्र सरकार के अगले निर्णय पर टिकी हुई है।

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