नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में सब्सिडी वाले उर्वरकों की बिक्री और वितरण पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने इन फैसलों पर चिंता जताते हुए कहा है कि यह कदम केंद्र सरकार के जैव उर्वरकों को बढ़ावा देने के प्रयासों के विपरीत है और इससे किसानों को नुकसान हो सकता है। संगठन का कहना है कि खरीफ मौसम से पहले उर्वरकों की उपलब्धता प्रभावित होने से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। विवाद को देखते हुए दोनों राज्य सरकारों से अपील की गई है कि वे अपने आदेश पर पुनर्विचार करें, ताकि किसानों को समय पर जरूरी खाद मिल सके।
गैर सब्सिडी उर्वरकों पर असर का खतरा
फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अनुसार यह निर्णय किसानों को जबरन सब्सिडी वाले उर्वरकों के साथ अन्य उत्पाद खरीदने से रोकने के उद्देश्य से लिया गया है, लेकिन इसका प्रभाव गैर सब्सिडी वाले महत्वपूर्ण उर्वरकों पर भी पड़ सकता है। इनमें सूक्ष्म पोषक तत्व, जैव उर्वरक और जल घुलनशील उर्वरक शामिल हैं, जो फसलों के संतुलित पोषण के लिए आवश्यक होते हैं। संगठन ने महाराष्ट्र के कृषि मंत्री से अपील करते हुए कहा है कि इस फैसले से किसानों तक इन जरूरी उत्पादों की पहुंच प्रभावित हो सकती है, इसलिए इस पर पुनर्विचार आवश्यक है।
संतुलित पोषण प्रबंधन पर पड़ सकता है असर
संगठन का मानना है कि इस तरह के प्रतिबंध संतुलित पोषण प्रबंधन को प्रभावित कर सकते हैं। उर्वरक उद्योग पहले से ही आपूर्ति से जुड़ी कई चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे में यह कदम स्थिति को और कठिन बना सकता है। साथ ही यह भी कहा गया कि उर्वरकों से जुड़े नियम उर्वरक नियंत्रण व्यवस्था के तहत तय होते हैं, इसलिए किसी राज्य द्वारा इस तरह का निर्णय लेना विवाद का विषय बन सकता है।
उद्योग और सरकार के बीच बढ़ा मतभेद
सूत्रों के अनुसार उत्तर प्रदेश में कुछ महीने पहले इसी तरह का निर्देश जारी किया गया था और अब महाराष्ट्र में भी इसे लागू किया गया है। सब्सिडी वाले उर्वरकों में मुख्य रूप से यूरिया, डीएपी और अन्य प्रमुख खाद शामिल हैं, जबकि गैर सब्सिडी वाले उर्वरकों में सूक्ष्म पोषक तत्व और विशेष खाद आते हैं, जो बेहतर उत्पादन के लिए जरूरी होते हैं। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि गैर सब्सिडी उर्वरकों का कारोबार तेजी से बढ़ा है और इसमें बड़े निवेश किए गए हैं। ऐसे में इन पर रोक जैसे कदम उद्योग और किसानों दोनों के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं।
समाधान के लिए संयुक्त समिति की मांग
फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने सुझाव दिया है कि इस मुद्दे के समाधान के लिए एक संयुक्त समिति बनाई जाए, जिसमें कृषि विभाग, उर्वरक कंपनियां, डीलर संगठन और किसान प्रतिनिधि शामिल हों। यह समिति व्यावहारिक और संतुलित समाधान निकाल सकती है, जिससे किसानों और उद्योग दोनों के हित सुरक्षित रह सकें। संगठन का मानना है कि खरीफ मौसम के दौरान किसानों को किसी भी तरह की उर्वरक कमी का सामना न करना पड़े, इसके लिए फिलहाल इस आदेश को स्थगित करने पर भी विचार किया जाना चाहिए।
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