भोपाल: मध्यप्रदेश में गेहूं की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी के बीच सियासी विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस ने खरीदी प्रक्रिया में अव्यवस्थाओं का आरोप लगाते हुए सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी ने 7 मई को प्रदेशव्यापी चक्का जाम का ऐलान किया है, जिससे कई जिलों में जनजीवन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
11 जिलों में प्रदर्शन की तैयारी
कांग्रेस के अनुसार यह आंदोलन बड़े स्तर पर किया जाएगा। मुंबई-आगरा मार्ग पर करीब 747 किलोमीटर के दायरे में चक्का जाम की योजना बनाई गई है, जो इंदौर से ग्वालियर और मुरैना तक फैला होगा। सुबह 11 बजे से शुरू होने वाले इस प्रदर्शन का असर लगभग 11 जिलों में देखने को मिल सकता है। पार्टी नेताओं ने कार्यकर्ताओं और किसानों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है।
किसानों के साथ अन्याय का आरोप
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर किसानों के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि तेज गर्मी में किसान अपनी उपज लेकर खरीद केंद्रों के बाहर खड़े रहने को मजबूर हैं। कई केंद्रों पर तौल कांटों की कमी, अव्यवस्था और देरी जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं, जिससे किसानों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
प्रमुख स्थानों पर रहेगा असर
इंदौर, खलघाट, शाजापुर, गुना, शिवपुरी, ग्वालियर और मुरैना जैसे प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शन की तैयारी की गई है। इन इलाकों में चक्का जाम के कारण यातायात बाधित होने की संभावना है, जिससे आम लोगों और व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है।
महत्वपूर्ण मार्ग पर बढ़ेगी दिक्कत
मुंबई-आगरा मार्ग प्रदेश के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक है, जो कई प्रमुख शहरों को जोड़ता है। इस मार्ग से हर घंटे बड़ी संख्या में वाहन गुजरते हैं। ऐसे में चक्का जाम के कारण माल ढुलाई और आवागमन दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
सियासी टकराव हुआ तेज
गेहूं खरीदी का मुद्दा अब बड़ा राजनीतिक विषय बन गया है। एक ओर सरकार अपने आंकड़ों के आधार पर व्यवस्था को सफल बता रही है, वहीं विपक्ष और किसान इसे जमीनी हकीकत से अलग बता रहे हैं। अब 7 मई का आंदोलन यह तय करेगा कि किसानों की नाराजगी कितनी व्यापक है और इसका आगे क्या असर पड़ता है।
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