नई दिल्ली: खेती में मुनाफा तभी संभव है जब पौधे स्वस्थ रहें और उन पर रोग या कीट हमला न करें। मिर्च के किसान अक्सर लीफ कर्ल वायरस से परेशान रहते हैं। यह वायरस इतना घातक होता है कि पौधे की बढ़त रुक जाती है, फूल लगना बंद हो जाता है और फल भी नहीं आते। लेकिन अब इसका एक देसी, सस्ता और कारगर समाधान सामने आया है, जिसे किसान खुद घर पर तैयार कर सकते हैं।
जैविक कीटनाशक का बढ़ता चलन
पिछले कुछ वर्षों में रासायनिक कीटनाशकों के दुष्प्रभावों के कारण किसान जैविक विकल्पों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। मिर्च के पौधों के लिए तंबाकू, चूना और हल्दी से बना विशेष मिश्रण एक ऐसा जैविक कीटनाशक है, जो न केवल रोगों को जड़ से खत्म करता है, बल्कि उपज को भी कई गुना बढ़ा देता है।
कैसे करता है असर
तंबाकू इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व कीटों को खत्म कर देते हैं। जबकि चूना पौधे में कैल्शियम की कमी को दूर करता है और मिट्टी के pH को संतुलित करता है, जिससे फूलों की संख्या बढ़कर वे फल में बदल जाते हैं। वहीं हल्दी एक प्राकृतिक एंटी-फंगल एजेंट है, जो फंगल संक्रमण को रोकने के साथ कीटों को भी भगाती है।
तैयार करने की विधि
इस जैविक कीटनाशक को बनाने के लिए एक लीटर पानी में 1 चम्मच चूना, 2 चुटकी तंबाकू और 1 चम्मच हल्दी मिलाएं। इस मिश्रण को 12 घंटे तक ढँक कर छोड़ दें। इसके बाद इसमें 3 लीटर और पानी मिलाकर स्प्रे बोतल में भर लें। सुबह या शाम के समय पौधों पर अच्छी तरह छिड़काव करें।
स्प्रे की आवृत्ति
अगर मिर्च के पौधे पहले से संक्रमित हैं, या उन पर फूल और फल नहीं आ रहे, तो इस मिश्रण का छिड़काव हफ्ते में तीन बार (एक दिन छोड़कर) करें। लगातार उपयोग से पत्ता मरोड़ रोग, कीट संक्रमण और फूल झड़ने की समस्या समाप्त हो जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि रासायनिक दवाओं की तुलना में यह घरेलू नुस्खा ज्यादा सुरक्षित, किफायती और असरदार है। ऐसे में मिर्च की खेती करने वाले किसानों के लिए यह देसी कीटनाशक न सिर्फ फसल बचाने का बल्कि मुनाफा बढ़ाने का भी कारगर तरीका साबित हो सकता है।

