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चावल की इस किस्म से बढ़ रही है छत्तीसगढ़ के किसानों की आय

Chhattisgadh Vishnubhog Rice

रायपुर, 23 जुलाई 2026: छत्तीसगढ़ का पारंपरिक सुगंधित विष्णुभोग चावल अब प्रदेश की सीमाओं से निकलकर देशभर में अपनी अलग पहचान बना रहा है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले का यह विशेष चावल एक जिला-एक उत्पाद योजना के अंतर्गत किसानों की आय बढ़ाने और महिला स्व-सहायता समूहों को स्थायी रोजगार उपलब्ध कराने का सफल उदाहरण बनकर सामने आया है। प्राकृतिक खेती, उत्कृष्ट गुणवत्ता, आकर्षक पैकेजिंग और प्रभावी विपणन के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।

विष्णुभोग चावल को मिल रही नई पहचान

राज्य सरकार स्थानीय कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी दिशा में विष्णुभोग चावल को मूल्य संवर्धन, आधुनिक विपणन और सशक्त पहचान से जोड़कर किसानों के लिए बेहतर आर्थिक अवसर तैयार किए जा रहे हैं। इसका लाभ अब सीधे किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच रहा है।

1,500 किसान कर रहे हैं विष्णुभोग धान की खेती

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के पेंड्रा क्षेत्र में लगभग 1,500 किसान करीब 600 एकड़ भूमि पर विष्णुभोग धान की खेती कर रहे हैं। अपनी प्राकृतिक सुगंध, बेहतरीन स्वाद और पौष्टिक गुणों के कारण यह चावल उपभोक्ताओं की पसंद बनता जा रहा है। किसानों द्वारा पारंपरिक और प्राकृतिक खेती अपनाने से इसकी गुणवत्ता में और सुधार हुआ है, जिसके चलते बाजार में इसकी मांग तेजी से बढ़ी है।

महिला समूहों को मिला रोजगार और आत्मनिर्भरता

जिले की मलनिया महिला कृषक उत्पादक कंपनी किसानों से विष्णुभोग धान खरीदकर उसका प्रसंस्करण कर रही है। इसके बाद आधुनिक पैकेजिंग और आकर्षक प्रस्तुति के साथ चावल को बाजार में उपलब्ध कराया जा रहा है। इस पहल से 15 महिलाओं को स्थायी रोजगार मिला है। महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं और अपनी आय में निरंतर वृद्धि कर रही हैं।

दो टन बिक्री से मिला लाख रुपये का लाभ

महिला समूह अब तक लगभग दो टन विष्णुभोग चावल की बिक्री कर करीब एक लाख रुपये का लाभ अर्जित कर चुका है। इससे न केवल महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर भी विकसित हुए हैं।

देशभर में बढ़ रही है विष्णुभोग चावल की मांग

विष्णुभोग चावल की लोकप्रियता अब छत्तीसगढ़ से बाहर भी तेजी से बढ़ रही है। अन्य राज्यों से भी इसकी मांग लगातार प्राप्त हो रही है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गुणवत्ता, विपणन और पहचान निर्माण पर इसी प्रकार ध्यान दिया जाता रहा तो आने वाले वर्षों में यह चावल अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकता है।

एक जिला-एक उत्पाद योजना से किसानों को मिला लाभ

एक जिला-एक उत्पाद योजना के माध्यम से स्थानीय कृषि उत्पादों को नई पहचान मिल रही है। इससे किसानों की आय में वृद्धि हो रही है, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है और महिला स्व-सहायता समूहों के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार हो रहे हैं। यह योजना स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

छत्तीसगढ़ की कृषि विरासत बन रहा विष्णुभोग चावल

विष्णुभोग चावल अब केवल एक पारंपरिक फसल नहीं रह गया है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की समृद्ध कृषि विरासत, किसानों की मेहनत और महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बन चुका है। उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन और बाजार विस्तार के क्षेत्र में हो रहे निरंतर प्रयासों से यह चावल भविष्य में राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी छत्तीसगढ़ की पहचान को नई ऊंचाई देने की क्षमता रखता है।

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