नई दिल्ली: खाद्य महंगाई पर काबू पाने और आम उपभोक्ताओं को राहत देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। उपभोक्ताओं को सस्ता आटा और चावल उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS) के तहत गेहूं और चावल की नई दरें तय की हैं। इस फैसले का लाभ सीधे तौर पर फ्लोर मिलर्स, बड़े व्यापारियों और राज्य सरकारों को मिलेगा, जो बाजार में कम कीमत पर अनाज की आपूर्ति सुनिश्चित करेंगे।
सरकार ने गेहूं की बिक्री दर 2,550 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित की है, जो न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से अधिक है। यह दर रबी विपणन सत्र 2025-26 से लागू होगी। वहीं चावल के लिए फिलहाल पुरानी दर 2,250 रुपये प्रति क्विंटल जारी रहेगी, जबकि 1 अक्टूबर से यह दर 2,320 रुपये प्रति क्विंटल हो जाएगी। टूटे चावल की नई कीमत 2,320 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई है, जो पहले 2,250 रुपये थी। इस चावल का उपयोग मुख्य रूप से डिस्टिलरियों में एथेनॉल उत्पादन के लिए होता है और इसकी अधिकतम बिक्री सीमा 52 लाख टन तय की गई है।
सरकार समय-समय पर भारतीय खाद्य निगम (FCI) के गोदामों में मौजूद स्टॉक को बाजार में उतारकर मांग-आपूर्ति में संतुलन और मूल्य नियंत्रण सुनिश्चित करती है। फिलहाल FCI के पास चावल, गेहूं और अन्य मोटे अनाज का भरपूर भंडार मौजूद है। रिपोर्ट के अनुसार, FCI के पास वर्तमान में चावल 37.99 मिलियन टन, कच्चा धान 32.25 मिलियन टन (जिससे करीब 21.6 मिलियन टन चावल निकलेगा), गेहूं 36.92 मिलियन टन और मोटा अनाज 0.46 मिलियन टन का स्टॉक है। राज्य सरकारों को अब चावल 2,320 रुपये प्रति क्विंटल की दर से मिलेगा, जो पहले 2,250 रुपये था। इसकी अधिकतम आपूर्ति सीमा 32 लाख टन तय की गई है। भारत ब्रांड चावल बेचने वाले केंद्रीय संगठनों जैसे NAFED, NCCF और केंद्रीय भंडार को यह चावल 2,480 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर मिलेगा।
निजी व्यापारियों के लिए भी चावल की नई दरें तय की गई हैं। 25% टूटे चावल की दर 2,890 रुपये प्रति क्विंटल, जबकि मिल ट्रांसफॉर्मेशन योजना के तहत 10% टूटे चावल की कीमत 3,090 रुपये प्रति क्विंटल होगी। वहीं, टूटे चावल की कीमत अब 2,320 रुपये प्रति क्विंटल कर दी गई है। मोटे अनाजों के लिए भी आरक्षित न्यूनतम कीमतें घोषित की गई हैं, जो 30 जून 2026 तक मान्य रहेंगी। इसमें बाजरा 2,775 रुपये, रागी 4,886 रुपये, ज्वार 3,749 रुपये और मक्का 2,400 रुपये प्रति क्विंटल की दर से मिलेगा। इन दरों में परिवहन लागत जोड़कर अंतिम बिक्री मूल्य तय किया जाएगा।
FCI यह सुनिश्चित करेगा कि PDS (सार्वजनिक वितरण प्रणाली) के लिए आवश्यक स्टॉक और बफर स्टॉक में कोई कमी न आए। इसके अलावा, आपातकालीन स्थिति के लिए 20 लाख टन गेहूं और 30 लाख टन चावल का अतिरिक्त भंडारण भी किया जाएगा।
गौरतलब है कि 1 जुलाई से भारत ब्रांड चावल बेचने वाले संगठनों को 200 रुपये प्रति क्विंटल की जो सहायता राशि कीमत स्थिरीकरण फंड से दी जाती थी, वह अब बंद कर दी गई है। सरकार का यह फैसला देश की खाद्य आपूर्ति को सुलभ, संतुलित और स्थिर बनाए रखने की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है। इससे एक ओर जहां उपभोक्ताओं को सस्ता अनाज मिलेगा, वहीं किसानों को भी अपने उत्पाद का बेहतर मूल्य मिल सकेगा, और साथ ही एथेनॉल जैसे वैकल्पिक ईंधन उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।

