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इस साल बंपर प्याज़ उत्पादन का अनुमान, किसानों को दाम गिरने का डर

प्याज़ उत्पादन

नई दिल्ली: देशभर में प्याज़ किसान इस साल की शुरुआत से ही बेहद कम दामों की वजह से भारी नुकसान झेल रहे हैं। कई राज्यों में किसानों को लागत भी नहीं निकल पा रही है। इस कारण प्याज़ को खेतों में फेंकना या सड़क पर डालने की घटनाएं बढ़ीं। इसके बावजूद किसानों का प्याज़ उत्पादन के प्रति झुकाव कम नहीं हुआ है। वे बड़े पैमाने पर खेती में लगे हुए हैं। अब एक बार फिर इस साल बंपर प्याज़ उत्पादन का अनुमान लगाया जा रहा है, जिससे किसानों की आय पर दाम गिरने का नया संकट मंडराने लगा है। अनुमानित उत्पादन इतना अधिक है कि घरेलू खपत, अधिकतम निर्यात और प्राकृतिक बर्बादी के बाद भी देश में लाखों टन प्याज़ बची रह सकती है। ऐसे में मंडियों में भारी आवक से कीमतों में भारी गिरावट की आशंका बढ़ गई है।

इस साल 308 लाख टन प्याज़ उत्पादन का अनुमान

केंद्रीय कृषि मंत्रालय की ओर से जारी बागवानी उत्पादन के अग्रिम अनुमानों में प्याज़ के उत्पादन में करीब 27% की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल 242.67 लाख टन प्याज़ उत्पादन हुआ था, जबकि इस बार यह आंकड़ा बढ़कर 307.89 लाख टन तक पहुंच सकता है। यह वृद्धि रिकॉर्ड स्तर पर मानी जा रही है और इतनी बड़ी मात्रा में उत्पादन बाजार के संतुलन को प्रभावित कर सकता है।

खपत और निर्यात के बाद भी बचेगी अतिरिक्त प्याज़

देश में प्याज़ की सालाना खपत लगभग 193.16 लाख टन मानी जाती है। अगर इसे 200 लाख टन भी मान लिया जाए, तब भी करीब 108 से 115 लाख टन प्याज़ अतिरिक्त बचने का अनुमान है। यह स्थिति किसानों के लिए गंभीर खतरा पैदा करती है, क्योंकि इतनी अधिक मात्रा बाज़ार में आने पर कीमतें और गिर सकती हैं। सरकार के सामने चुनौती है कि अतिरिक्त प्याज़ को कैसे प्रबंधित किया जाए ताकि किसानों को उचित न्यूनतम समर्थन मूल्य जैसा फायदा मिल सके।

भारत का प्याज़ निर्यात: क्षमता ज्यादा, परिणाम कम

भारत दुनिया के प्रमुख प्याज़ निर्यातक देशों में से एक रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में घरेलू कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने निर्यात शुल्क और निर्यात प्रतिबंध जैसी नीतियां लागू की थीं। इससे विदेशी खरीदारों का भरोसा कमजोर हुआ। वर्तमान में निर्यात शुल्क शून्य है, लेकिन पुराने प्रतिबंधों के कारण विदेशी आयातक अब भी सतर्क हैं। भारत ने किसी एक वर्ष में अधिकतम 25 लाख टन प्याज़ का निर्यात किया है, जबकि औसत निर्यात 10 से 15 लाख टन रहता है। अगर संभावित 108–115 लाख टन अतिरिक्त प्याज़ में से 25 लाख टन भी निर्यात हो जाए, तब भी लगभग 95–98 लाख टन प्याज़ देश में बची रहेगी।

भंडारण में सड़ने के बाद भी रहेगा अधिशेष

प्याज़ की सबसे बड़ी समस्या उसका सुरक्षित भंडारण है। विशेषज्ञ बताते हैं कि तीन महीने में लगभग 10% और छह महीने में 30% प्याज़ खराब हो जाती है। यदि सरकार निर्यात को बढ़ावा नहीं देती और घरेलू खपत स्थिर रहती है, तो भंडारण में सड़ने की मात्रा बढ़ सकती है। इसके बावजूद अनुमान है कि बाजार में प्याज़ की भारी मात्रा उपलब्ध रहेगी और किसानों को अपेक्षित कीमत नहीं मिल पाएगी। मंडियों में अत्यधिक आवक और उपज बर्बादी के बाद भी अधिशेष रहने से बाजार में दाम लगातार दबाव में रहेंगे।

बढ़ते उत्पादन के बीच सरकार की नीतियों पर उठे सवाल

प्याज़ किसान पहले से ही सरकार की नीतियों को लेकर असंतोष जाहिर करते रहे हैं। अब जब उत्पादन रेकॉर्ड स्तर पर होने जा रहा है, तो किसानों की चिंता यह है कि सरकार उनके उत्पाद का प्रबंधन कैसे करेगी। क्या सरकार समय रहते निर्यात बढ़ाएगी, क्या भंडारण ढांचे को मजबूत किया जाएगा और क्या किसानों को उचित दाम दिलाने के उपाय किए जाएंगे? इन सवालों के जवाब आने वाले महीनों में देश के प्याज़ बाजार की दिशा तय करेंगे।

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