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मार्च में उड़द की खेती से बढ़ेगी आमदनी, VBN-8 किस्म की मांग तेज

Black gram cultivation in March

लखनऊ: ग्रीष्मकालीन यानी जायद सीजन में उड़द की खेती किसानों के लिए लाभकारी विकल्प बनकर उभर रही है। उड़द, जिसे आम बोलचाल में काला चना भी कहा जाता है, देश की प्रमुख दलहनी फसलों में शामिल है। कम लागत और कम अवधि में तैयार होने वाली यह फसल खरीफ सीजन से पहले अतिरिक्त आमदनी का अवसर देती है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार उड़द की खासियत यह है कि यह मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाती है, जिससे अगली फसलों की उपज बेहतर होती है। मार्च में उड़द की खेती कर किसान अच्छी आमदनी प्राप्त कर सकते हैं।

ऑनलाइन उपलब्ध हैं प्रमाणित बीज

धान और गेहूं के साथ अब किसान दलहनी फसलों की ओर भी तेजी से रुख कर रहे हैं। सरकार भी दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित कर रही है। किसानों की सुविधा के लिए राष्ट्रीय बीज निगम द्वारा उड़द के प्रमाणित बीज ऑनलाइन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। किसान निगम के ऑनलाइन स्टोर से बीज मंगाकर घर बैठे खेती की तैयारी कर सकते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि उड़द की खेती मार्च-अप्रैल के अलावा खरीफ और रबी सीजन में भी की जा सकती है, लेकिन जायद सीजन में इसकी मांग अधिक रहती है।

VBN-8 किस्म की विशेषताएं

उड़द की उन्नत किस्म VBN-8 को अधिक उत्पादन देने वाली वैरायटी माना जाता है। यह किस्म पीला मोजेक रोग के प्रति प्रतिरोधी बताई जाती है और दोनों प्रमुख सीजन में खेती के लिए उपयुक्त है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इस किस्म से 11 से 12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज प्राप्त की जा सकती है। फसल मात्र 65 से 70 दिनों में तैयार हो जाती है। इसकी खेती राजस्थान, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों में की जा रही है।

बीज की कीमत और छूट

राष्ट्रीय बीज निगम की वेबसाइट पर VBN-8 किस्म का 4 किलोग्राम का पैकेट फिलहाल 16 प्रतिशत छूट के साथ 540 रुपये में उपलब्ध है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रमाणित बीज के उपयोग से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार होता है।

ऐसे करें खेत की तैयारी

उड़द की सफल खेती के लिए खेत की अच्छी तैयारी जरूरी है। बुवाई से पहले दो से तीन बार जुताई कर मिट्टी भुरभुरी कर लें। इसके बाद हल्की जुताई कर ढेलों को तोड़ें और खरपतवार नष्ट करें। जायद सीजन में बुवाई के दौरान पौधे से पौधे की दूरी 10 सेंटीमीटर और पंक्ति से पंक्ति की दूरी 30 सेंटीमीटर रखने की सलाह दी जाती है। गेहूं की कटाई के बाद खाली खेत में उड़द की खेती कर किसान अतिरिक्त आमदनी प्राप्त कर सकते हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सही किस्म का चयन, प्रमाणित बीज और वैज्ञानिक पद्धति अपनाने से उड़द की खेती किसानों के लिए लाभ का मजबूत साधन बन सकती है।

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