पटना: बिहार में भूमि से जुड़ी त्रुटियों, उत्तराधिकार नामांतरण और बंटवारे जैसे सुधारों को लेकर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से चलाए जा रहे बिहार राजस्व महाअभियान को लेकर पूरे राज्य में शिविरों और अंचल कार्यालयों पर लोगों की भीड़ उमड़ रही है। विभाग की ओर से 16 अगस्त से शुरू हुए इस अभियान के तहत 19 अगस्त से 8 सितंबर तक 38 जिलों में 7514 शिविर आयोजित किए गए, जहां अब तक 12 लाख 902 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें सबसे अधिक आवेदन जमाबंदी सुधार से जुड़े हैं।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार 24 दिनों में करीब 2 करोड़ 80 लाख से अधिक जमाबंदी पंजी प्रतियां रैयतों के बीच वितरित की जा चुकी हैं, जबकि लक्ष्य 3 करोड़ 60 लाख प्रतियों का है। इसके बावजूद शिविरों में आवेदन प्राप्त होने का अनुपात अभी 5% से भी कम है।
अब तक 12 लाख आवेदन, जमाबंदी सुधार सबसे आगे
राजस्व महाअभियान के दौरान मिले 12 लाख 902 आवेदनों में से 9 लाख 13 हजार 230 आवेदन जमाबंदी सुधार से जुड़े हैं। इसके अलावा 1.69 लाख आवेदन ऑफलाइन जमाबंदी को ऑनलाइन करने के लिए, 63 हजार आवेदन उत्तराधिकार नामांतरण और 54 हजार आवेदन बंटवारे के नामांतरण के लिए जमा हुए हैं।
बिहार राजस्व महाअभियान में औरंगाबाद जिला सबसे आगे
आवेदनों की संख्या में औरंगाबाद जिला सबसे आगे है, जहां अब तक 90,188 आवेदन मिले हैं। इसके बाद अररिया (88,900) और पटना (70,794) दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। गया, मधुबनी, सुपौल, दरभंगा, नालंदा, गोपालगंज और समस्तीपुर भी टॉप-10 जिलों में शामिल हैं।
जमाबंदी वितरण में जहानाबाद अव्वल
जमाबंदी प्रतियों के वितरण में जहानाबाद (92.40%), सीतामढ़ी (91.96%) और शिवहर (90.91%) शीर्ष पर हैं। इनके अलावा मुजफ्फरपुर, कैमूर, खगड़िया, अररिया, बक्सर, वैशाली और मधेपुरा ने भी 85% से अधिक वितरण कर सराहनीय प्रदर्शन किया है।
15 सितंबर तक लक्ष्य पूरा करने का आदेश
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने कहा कि 15 सितंबर तक सभी पात्र परिवारों को उनकी जमाबंदी पंजी की प्रति उपलब्ध कराना विभाग का लक्ष्य है। इसके लिए अंचल स्तर पर माइक्रो प्लान बनाकर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि शिविर में आने वाले किसी भी रैयत के आवेदन को अस्वीकार न किया जाए।
राजस्व महाअभियान के तहत जमाबंदी पंजी की त्रुटियों में सुधार, छूटी हुई जमाबंदी को ऑनलाइन करना, उत्तराधिकार और बंटवारे के नामांतरण की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जा रही है। इस अभियान से लाखों रैयतों को अपनी भूमि से संबंधित कागजात दुरुस्त कराने का अवसर मिल रहा है, जिससे आने वाले समय में जमीन विवाद और रिकार्ड संबंधी समस्याएं कम होंगी।
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