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मशरूम उत्पादन में बिहार बना देश का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य

पटना: कभी सीमित स्तर पर की जाने वाली मशरूम खेती अब राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023-24 में बिहार ने देश के कुल मशरूम उत्पादन में करीब 12.02 प्रतिशत योगदान दिया और इसी के साथ वह भारत का सबसे बड़ा मशरूम उत्पादक राज्य बन गया। पिछले एक दशक में राज्य में मशरूम उत्पादन में हुई तेज बढ़ोतरी ने इसे किसानों के लिए आय और रोजगार के नए अवसर देने वाले प्रमुख कृषि उद्यम के रूप में स्थापित किया है। भारत दुनिया में मशरूम उत्पादन के मामले में चौथे स्थान पर पहुंच चुका है और राष्ट्रीय उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। कम जमीन, कम पानी और सीमित निवेश में शुरू की जा सकने वाली इस खेती ने खासतौर पर छोटे और सीमांत किसानों के बीच अपनी जगह बनाई है।

दस साल में 700 गुना से ज्यादा बढ़ा उत्पादन

बिहार में मशरूम उत्पादन में पिछले दस वर्षों के दौरान असाधारण वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2013-14 में राज्य में मशरूम का उत्पादन केवल 0.06 हजार मीट्रिक टन था। इसके बाद उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी हुई और वर्ष 2023-24 में यह बढ़कर 42.19 हजार मीट्रिक टन तक पहुंच गया। इस अवधि में मशरूम उत्पादन की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर 92.62 प्रतिशत रही। कृषि क्षेत्र के लिहाज से यह बेहद तेज वृद्धि मानी जाती है। आंकड़े बताते हैं कि बिहार ने अपेक्षाकृत कम समय में मशरूम उत्पादन को छोटे स्तर की खेती से निकालकर बड़े कृषि उद्यम का रूप देने में सफलता हासिल की है। राज्य में उत्पादन के बढ़ने के पीछे किसानों को प्रशिक्षण देने, उत्पादन तकनीक उपलब्ध कराने, सरकारी सहायता देने और बाजार से जोड़ने जैसे कई प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

प्रशिक्षण और तकनीक से किसानों को मिला फायदा

मशरूम की खेती के विस्तार के लिए किसानों को वैज्ञानिक तरीके से उत्पादन करने का प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही स्पॉन उत्पादन, उत्पादन इकाइयों की स्थापना और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया गया। इससे किसानों को मशरूम उत्पादन की बेहतर जानकारी मिली और उत्पादन की गुणवत्ता तथा मात्रा में सुधार करने के अवसर बढ़े। सरकारी योजनाओं के माध्यम से किसानों और महिला समूहों को भी इस क्षेत्र से जोड़ने का प्रयास किया गया।

सरकारी योजनाओं ने दी मशरूम खेती को रफ्तार

बिहार में मशरूम खेती को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग कृषि योजनाओं और कृषि रोडमैप के माध्यम से लगातार प्रयास किए गए हैं। दूसरे कृषि रोडमैप के दौरान मशरूम उत्पादन इकाइयों को बढ़ावा दिया गया, जबकि तीसरे कृषि रोडमैप में एकीकृत मशरूम इकाइयों, महिला समूहों और उत्पादन विस्तार पर विशेष जोर दिया गया।

वर्ष 2017 में एकीकृत मशरूम विकास इकाई की शुरुआत के माध्यम से स्पॉन उत्पादन और प्रशिक्षण केंद्रों को बढ़ावा दिया गया। इससे किसानों को उत्पादन सामग्री और तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध कराने में मदद मिली। वर्ष 2019 में फसल अवशेष प्रबंधन से जुड़ी पहल के तहत धान के पुआल का इस्तेमाल मशरूम उत्पादन में करने को प्रोत्साहित किया गया। इससे कृषि अवशेषों के बेहतर इस्तेमाल के साथ किसानों के लिए कम लागत में उत्पादन का रास्ता भी खुला।

किसानों को मिली सब्सिडी और आर्थिक सहायता

वर्ष 2023 में मशरूम किट वितरण योजना के तहत किसानों को 90 प्रतिशत अनुदान पर मशरूम किट उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई। इससे सीमित संसाधनों वाले किसानों के लिए मशरूम उत्पादन शुरू करना आसान हुआ। इसी वर्ष एकीकृत बागवानी विकास योजना के तहत मशरूम इकाइयों की स्थापना के लिए 50 प्रतिशत तक अनुदान और 10 लाख रुपये तक की सहायता का प्रावधान किया गया। मशरूम उत्पादन के लिए शेड तैयार करने को भी प्रोत्साहन दिया गया और वर्ष 2023-24 में मशरूम शेड निर्माण पर 50 प्रतिशत अनुदान की व्यवस्था की गई। कृषि रोडमैप के चौथे चरण, जो वर्ष 2023 से 2028 तक के लिए है, में मशरूम को आय, रोजगार और पोषण बढ़ाने वाले महत्वपूर्ण कृषि उद्यम के रूप में शामिल किया गया है।

धान के पुआल से मशरूम उत्पादन को बढ़ावा

मशरूम उत्पादन में धान के पुआल का इस्तेमाल किसानों के लिए अतिरिक्त अवसर पैदा करता है। इससे खेतों से निकलने वाले कृषि अवशेषों का उपयोगी इस्तेमाल किया जा सकता है और किसान इसे आय के साधन में बदल सकते हैं। इस पहल से एक तरफ कृषि अवशेषों के प्रबंधन में मदद मिलती है, वहीं दूसरी तरफ मशरूम उत्पादन की लागत को नियंत्रित करने का अवसर भी मिलता है।

महिला किसानों ने भी बनाई अलग पहचान

बिहार की मशरूम क्रांति में महिलाओं की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है। प्रशिक्षण कार्यक्रमों और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से बड़ी संख्या में महिलाएं मशरूम उत्पादन से जुड़ रही हैं। बांका जिले की बिनीता कुमारी इसका उदाहरण हैं। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र से प्रशिक्षण लेने के बाद मशरूम उत्पादन और विपणन का सफल मॉडल तैयार किया। इसके बाद उन्होंने अन्य महिलाओं को भी इस काम से जोड़ा।

उनके समूह से जुड़ी महिलाएं नियमित आमदनी हासिल कर रही हैं। बेहतर काम के लिए बिनीता कुमारी को मशरूम उत्पादन से संबंधित पुरस्कार भी मिल चुका है। इससे पता चलता है कि मशरूम खेती ग्रामीण महिलाओं के लिए आय का स्थायी जरिया बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

कम जमीन और पानी में शुरू हो सकती है खेती

मशरूम खेती की सबसे बड़ी विशेषताओं में कम जमीन और कम पानी की आवश्यकता शामिल है। इसके लिए बहुत बड़े कृषि क्षेत्र की जरूरत नहीं होती और सीमित निवेश से भी उत्पादन शुरू किया जा सकता है। इसी वजह से छोटे और सीमांत किसान इस खेती की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। पारंपरिक फसलों के साथ मशरूम उत्पादन करने से किसानों को अतिरिक्त आमदनी का अवसर मिल सकता है। बिहार में विशेष रूप से सीप और बटन मशरूम के उत्पादन को अच्छी पहचान मिली है। इनकी मांग के कारण किसानों के लिए स्थानीय स्तर पर भी बाजार तैयार हुआ है।

खेती के साथ रोजगार का भी बढ़ा दायरा

मशरूम उत्पादन केवल किसानों की आमदनी बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इससे स्पॉन उत्पादन, उत्पादन इकाइयों की स्थापना, पैकिंग, प्रसंस्करण, परिवहन और विपणन जैसे क्षेत्रों में भी रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। यदि इन गतिविधियों को गांव और प्रखंड स्तर पर विकसित किया जाए तो कृषि आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मशरूम उद्योग की भूमिका और बढ़ सकती है।

प्रसंस्करण और भंडारण पर सरकार का जोर

राज्य सरकार अब मशरूम उत्पादन को अगले स्तर तक ले जाने की तैयारी कर रही है। इसके तहत आधुनिक प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना, भंडारण सुविधाओं का विस्तार और किसानों को बाजार से बेहतर तरीके से जोड़ने की योजना पर काम किया जा रहा है। किसान उत्पादक समूहों और उत्पादन समूहों के गठन से छोटे किसानों को सामूहिक रूप से उत्पादन और विपणन करने में मदद मिल सकती है। इससे उनकी बाजार में सौदेबाजी की क्षमता बढ़ने और बेहतर मूल्य हासिल करने की संभावना भी बढ़ेगी। औषधीय मशरूम के उत्पादन को भी बढ़ावा देने की योजना है। इससे मशरूम की विभिन्न किस्मों के उत्पादन और बाजार का विस्तार किया जा सकता है।

बिहार की मशरूम खेती के सामने बड़ा अवसर

पिछले एक दशक में उत्पादन में हुई तेज वृद्धि ने बिहार को देश के प्रमुख मशरूम उत्पादक राज्यों में सबसे आगे पहुंचा दिया है। अब चुनौती इस उपलब्धि को टिकाऊ बनाते हुए किसानों की आय, उत्पाद की गुणवत्ता और बाजार पहुंच को और मजबूत करने की है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि उत्पादन, प्रसंस्करण, भंडारण और विपणन की सुविधाओं का विस्तार इसी गति से होता रहा तो बिहार देश के साथ-साथ वैश्विक मशरूम बाजार में भी अपनी मजबूत पहचान बना सकता है। मशरूम खेती राज्य में किसानों की अतिरिक्त आय बढ़ाने, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार पैदा करने, कृषि अवशेषों के उपयोग और महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण का महत्वपूर्ण माध्यम बनती जा रही है।

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