लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों को समय पर उचित मूल्य पर उर्वरक उपलब्ध कराने हेतु कड़े कदम उठाए हैं। कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही ने घोषणा की है कि अब पीओएस मशीन पर रसीद देना अनिवार्य होगा और निर्धारित खुदरा दर से अधिक दाम पर कोई भी उर्वरक नहीं बेचा जाएगा। यदि विक्रेता किसानों को बाध्य कर अन्य उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर करेगा या तय दर से अधिक वसूली करेगा, तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
वर्तमान खरीफ सीज़न के लिए अब तक 39.58 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध कराया गया है, जिसमें से करीब 25.62 लाख मीट्रिक टन की बिक्री हो चुकी है और 9.91 लाख टन स्टॉक में है। हाल ही में लखनऊ और सीतापुर में औचक निरीक्षण के दौरान कई अनियमितताएं पाई गईं। सीतापुर में जैन इंटरप्राइजेज, बालाजी ट्रेडर्स और न्यू अय्यूब खाद भंडार को सील किया गया, जबकि लखनऊ के किसान खाद भंडार पर अधिक कीमत वसूले जाने की पुष्टि हुई। उदाहरण के तौर पर, थोक विक्रेता ओमप्रकाश और जयप्रकाश ने यूरिया के बैग 266.50 रुपये की जगह 300 रुपये में बेचने का प्रयास किया। इस पर दोनों का लाइसेंस निलंबित कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई।
कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि बिना रसीद बिक्री पर पूरी तरह रोक रहेगी। सभी लेनदेन पीओएस मशीन से होंगे और खाद की बिक्री किसान की फसल एवं जोत के अनुसार ही की जाएगी। साथ ही, नीम-कोटेड यूरिया का औद्योगिक उपयोग सख्ती से प्रतिबंधित रहेगा। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि प्रदेश में पहले जारी किए गए 1,07,000 खुदरा लाइसेंस में से 23,000 गैर-कार्यशील लाइसेंस हटा दिए गए हैं। अब केवल सक्रिय लाइसेंसधारी ही खाद बेच सकेंगे।
प्रदेशभर में निगरानी बढ़ा दी गई है और शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। उदाहरण के तौर पर कुशीनगर और बलरामपुर में मिली शिकायतों पर विक्रेताओं के लाइसेंस रद्द कर दिए गए और एफआईआर दर्ज की गई। इस नए नियम से खाद बिक्री व्यवस्था अधिक पारदर्शी और नियंत्रित होने की उम्मीद है, जिससे किसानों को सही मूल्य पर समय से उर्वरक उपलब्ध हो सकेगा।

