पटना: हर साल आने वाली बाढ़ किसानों के लिए दोहरी मार लेकर आती है। फसलें तबाह हो जाती हैं और पानी उतरने के बाद खेतों की मिट्टी भी बंजर और सख्त हो जाती है। यही नहीं, बाढ़ के बाद खेत की मिट्टी से आवश्यक पोषक तत्व बह जाते हैं और अगली फसल की उत्पादकता भी प्रभावित होती है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर किसान बिना मिट्टी को उपजाऊ बनाए बुवाई करेंगे तो फसल तो खराब होगी ही, साथ में बीज और मेहनत दोनों बर्बाद हो जाएंगे।
बाढ़ के बाद मिट्टी में सिल्ट का प्रबंधन
बाढ़ के कारण खेतों में सिल्ट यानी गाद की परत जम जाती है।
अगर परत पतली है (2–5 सेमी), तो गहरी जुताई और रोटावेटर से मिट्टी में मिला दें।
लेकिन अगर गाद की परत मोटी है (6 इंच या ज्यादा), तो उसे हटाने के लिए ट्रैक्टर, JCB मशीन या लेज़र लेवलर का इस्तेमाल करना होगा।
इसके बाद खेत को कुछ दिन धूप में छोड़ना जरूरी है ताकि अतिरिक्त नमी कम हो सके।
मिट्टी की जांच है सबसे जरूरी
बाढ़ के बाद मिट्टी की जांच (Soil Testing) कराना जरूरी है। जांच से pH स्तर, नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम और जैविक कार्बन की कमी का पता चल जाता है। इसी आधार पर किसान अपनी मिट्टी में खाद और पोषक तत्वों की पूर्ति कर सकते हैं।
मिट्टी को फिर से जीवित करने के उपाय
खेत में हरी खाद (Green Manure) जैसे मूंग, ढैंचा, सन और उड़द बोकर 40–45 दिन बाद पलट दें। इससे नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है।
गोबर की खाद या कम्पोस्ट 8–10 टन प्रति एकड़ की दर से डालें।
केंचुआ खाद (Vermicompost) से सूक्ष्मजीव बढ़ते हैं और पौधों को तुरंत पोषण मिलता है।
फसल अवशेष और पराली को मिट्टी में मिलाकर जैविक कार्बन की भरपाई की जा सकती है।
जैविक और सूक्ष्मजीव आधारित उपाय
मिट्टी की उर्वरता और जीवंतता बढ़ाने के लिए किसानों को बायोफर्टिलाइज़र और जैविक उपाय अपनाने चाहिए।
राइजोबियम, एजोटोबैक्टर, फॉस्फेट सॉल्युबिलाइजिंग बैक्टीरिया का इस्तेमाल करें।
पौधों की जड़ों को मजबूत करने के लिए मायकोराइज़ा फफूंद डालें।
जीवामृत, पंचगव्य और नीम घोल जैसे जैविक घोल मिट्टी को जल्दी स्वस्थ बनाते हैं।
किसानों को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों का कहना है कि बाढ़ के बाद अगली फसल की जल्दीबाजी करने के बजाय पहले खेत की मिट्टी को दोबारा से संतुलित और उपजाऊ बनाना जरूरी है। ऐसा करने से न सिर्फ फसल बेहतर होगी बल्कि खेत की दीर्घकालिक उत्पादकता भी बनी रहेगी।
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