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एलोवेरा की खेती किसानों के लिए बन रही मुनाफे का सौदा

एलोवेरा की खेती

नई दिल्ली: औषधीय और कॉस्मेटिक इंडस्ट्री में तेजी से बढ़ती मांग के कारण एलोवेरा की खेती आज किसानों के लिए एक बेहद फायदे का विकल्प बन चुकी है. आयुर्वेदिक दवाइयों, ब्यूटी और स्किन-केयर प्रोडक्ट्स, एलोवेरा जूस और जेल में इसके बड़े पैमाने पर उपयोग ने बाजार को मजबूत बनाया है. कम लागत में शुरू होने वाली यह खेती कई वर्षों तक लगातार आमदनी देती है, इसलिए देश के कई किसान पारंपरिक फसलों को छोड़कर एलोवेरा की ओर रुख कर रहे हैं.

एलोवेरा की खेती के लिए उपयुक्त जमीन और जलवायु

एलोवेरा की बुआई के लिए बहुत अधिक उपजाऊ जमीन की आवश्यकता नहीं होती. यह हल्की बलुई या दोमट मिट्टी में बेहतर तरीके से उगता है. खेत में जल निकास की व्यवस्था अच्छी होनी चाहिए क्योंकि पानी भरने से पौधों के खराब होने का खतरा रहता है. गर्म और शुष्क जलवायु एलोवेरा के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है. कम पानी में भी अच्छी पैदावार देने की क्षमता के कारण सिंचाई पर होने वाला खर्च काफी कम हो जाता है.

रोपाई की विधि और फसल की अवधि

एलोवेरा की बुआई मुख्य रूप से पौधों के माध्यम से की जाती है. एक एकड़ जमीन में लगभग 6,000 से 7,000 पौधे लगाए जाते हैं. कतार से कतार और पौधे से पौधे की दूरी करीब 2-2 फीट रखी जाती है. रोपण के 7 से 8 महीने बाद पहली कटाई शुरू हो जाती है. एक बार फसल लगाने के बाद 4 से 5 साल तक लगातार उत्पादन लिया जा सकता है, जिससे बार-बार बुवाई का खर्च नहीं उठाना पड़ता.

एलोवेरा की खेती में लागत और उत्पादन

एक एकड़ में एलोवेरा की खेती की शुरुआती लागत लगभग 50 हजार रुपये तक आती है. इसमें पौधों की खरीद, खेत की तैयारी और शुरुआती देखभाल का खर्च शामिल होता है. एक एकड़ भूमि से सालाना औसतन 40 से 50 टन एलोवेरा की पत्तियां प्राप्त होती हैं. बाजार में एलोवेरा की पत्तियों का भाव 3 से 6 रुपये प्रति किलो तक रहता है, जो क्षेत्र और मांग के अनुसार बदलता है.

एलोवेरा की खेती से कमाई और नेट प्रॉफिट

अगर औसतन 4 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक्री की जाए, तो एक एकड़ से करीब 1.5 लाख रुपये तक की सालाना आमदनी संभव है. सभी खर्च निकालने के बाद किसान को प्रति एकड़ लगभग 1 लाख से 1.10 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा हो सकता है. यदि किसान एलोवेरा की प्रोसेसिंग कर जूस, जेल या अन्य उत्पाद बनाकर खुद बेचता है, तो मुनाफा कई गुना तक बढ़ सकता है.

कम लागत, कम जोखिम और स्थायी बाजार वाली फसल

कम लागत, कम जोखिम और लगातार बढ़ती मांग के कारण एलोवेरा की खेती किसानों के लिए एक सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्प बन गई है. कम पानी और सीमित संसाधनों में ज्यादा कमाई करने की चाह रखने वाले किसानों के लिए यह फसल बेहद उपयोगी साबित हो रही है. यही वजह है कि एलोवेरा की खेती को आज के समय में ‘कम लागत में ज्यादा मुनाफे’ वाली खेती माना जा रहा है.

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