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ऐसे शुरू करें तुलसी की व्यावसायिक खेती

What is Tulsi ? Its Uses, Side Effects, Interactions, Dosage and advantages

तुलसी एक ऐसा पौधा है जिसका महत्व प्राचीन काल से ही बना हुआ है। औषधी के रूप में इसके महत्व से कमोबेस हम सब वाकिफ़ हैं। पर क्या आपको पता है कि इसकी खेती करके आप काफी अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं?? जी हाँ, तुसली का औषधीय महत्व तो है ही, व्यावसायिक दृष्टि से भी यह अच्छी आय देनी वाली एक औषधीय फसल है।

तुलसी के पौधे को खेत में लगाने का सबसे सही समय होता है जुलाई का महीना। जलवायु के लिहाज से तुलसी की खेती तकरीबन भारत के सभी हिस्सों में की जा सकती है। हमारे यहाँ उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखण्ड और पश्चिमी बंगाल जैसे कुछ राज्यों में तुलसी की खेती व्यावसायिक तौर पर की जाती है।

अगर बात करें तुलसी कि कुछ बेहतर प्रजातियों की तो ये हैं – द्रुद्रीहा, रामकली, बाबी, अमृता, वाना और कपूर इत्यादि।

तुलसी की खेती कई प्रकार की मिट्टियों में की जा सकती है। लेकिन अच्छी पैदावार के लिए आपको नमकीन, क्षारीय और पानी रोकने वाली मिट्टी में तुलसी की खेती करने से बचना चाहिए। बढ़िया जल निकास वाली मिट्टी जिसमे अच्छे जैविक तत्व मौजूद हों, उसमें तुलसी की खेती बढ़िया पैदावार देती है। तुलसी के अच्छे विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5से 7 बीच होना ज़रूरी है।

तुलसी के पौधे को 45 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाने से अच्छे परिणाम मिलते हैं। यदि आप RRLOC 12 या फिर RRLOC 14 किस्म के पौधे लगा रहे हैं तो इन्हें 50 गुणा 50 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाएँ। तुलसी की रोपाई के लिए केवल स्वस्थ पौधे का चुनाव करें, ताकि पैदावार अच्छी हो और ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाया जा सके। जहाँ तक बात है बुआई के लिए बीज की मात्रा की तो प्रति एकड़ 120 ग्राम बीजों का प्रयोग करें।

तुलसी के पौध लगाने के बाद ही हल्की सिंचाई करें। यह ध्यान रखें कि फसल की नियमित रूप से सिंचाई आवश्यक है। गर्मी के मौसम में खास कर जब बहुत अधिक गर्मी पड़ रही हो तब एक महीने में कम से कम दो बार सिंचाई अवश्य करें। फसल तैयार होने और फसल कटने से कम से कम 10 दिन पहले सिंचाई करना बंद कर दें, ताकि फसल की कटाई में सुविधा हो।

अब अगर बात करें मुनाफे की तो तुलसी के बीज मंडी में 30 से 40 हजार रुपए प्रति क्विंटल के भाव में आसानी से बिक जाते हैं। इससे किसान को लाखो का फायदा होता है। हाल के वर्षों में लोगों का झुकाव जिस प्रकार जैविक व औषधीय उत्पादों की ओर हुआ है उसे देखते हुए यह कहा जा सकता है आने वाले समय में तुलसी का व्यावसायिक महत्व और भी बढ़ने वाला है।

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