लुधियाना: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि खेती को पुनर्जीवित करने और किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (कृषि में AI) का उपयोग अनिवार्य हो गया है। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित किसान मेले में उन्होंने बताया कि हरित क्रांति के समय राज्य ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, लेकिन इसके चलते मिट्टी और पानी के संसाधनों में भारी कमी आई है। उनका कहना है कि पारंपरिक खेती अब लाभदायक नहीं रही और किसानों को नई तकनीकों की ओर बढ़ना होगा।
पैदावार बढ़ाने के लिए नई तकनीक आवश्यक
मुख्यमंत्री मान ने कहा कि खेती से होने वाली आमदनी लगातार घट रही है और फसलों की पैदावार एक जगह ठहर गई है। ऐसे में पैदावार बढ़ाने और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीकों को अपनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह तकनीक किसानों को उपयुक्त फसल चुनने और सही समय पर खेती करने में मदद करेगी, जिससे लाभ में बढ़ोतरी होगी।
किसानों को दिन में मिल रही निर्बाध बिजली
सरकारी प्रयासों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि धान के मौसम में किसानों को आठ घंटे से अधिक निर्बाध बिजली उपलब्ध कराई गई थी और अब सिंचाई के लिए दिन के समय बिजली दी जा रही है। गन्ना उत्पादक किसानों को 416 रुपये प्रति क्विंटल भुगतान किया जा रहा है, जो देश में सबसे अधिक है। गेहूं और धान की खरीद के लिए हर वर्ष लगभग 80,000 करोड़ रुपये सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजे जाते हैं।
सिंचाई क्षेत्र हुआ विस्तृत
मुख्यमंत्री ने बताया कि नहरों से सिंचाई का दायरा वर्ष 2022 के लगभग 21 लाख एकड़ से बढ़कर अब 58 लाख एकड़ हो गया है। इसके लिए हजारों नहरों और पानी की नालियों की सफाई और मरम्मत कराई गई है। उन्होंने कहा कि देश की कुल खेती योग्य भूमि में पंजाब का हिस्सा मात्र तीन प्रतिशत है, फिर भी राज्य केंद्रीय भंडार में लगभग 40 प्रतिशत गेहूं और 31 प्रतिशत चावल का योगदान देता है।
महिलाओं के लिए नयी आर्थिक सहायता योजना
मुख्यमंत्री ने बताया कि जापान सहयोग एजेंसी की सहायता से 1,300 करोड़ रुपये की परियोजना शुरू की जाएगी, जिससे बागवानी को बढ़ावा मिलेगा। जनहित की योजनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य स्तरीय योजना के अंतर्गत महिलाओं को प्रति माह 1,000 रुपये की सहायता दी जाएगी।
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