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रबी सीजन में डीएपी की जगह सिंगल सुपर फॉस्फेट अपनाने की सलाह, फसल वृद्धि और लागत में होगा फायदा

रबी फसलों की बुवाई के इस महत्वपूर्ण समय में किसानों को डीएपी की बजाय सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) का इस्तेमाल करने की सलाह दी जा रही है। एसकेएन कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर के कुलपति प्रोफेसर बलराज सिंह ने गेहूं, जौ, चना और सरसों जैसी रबी फसलों की बेहतर वृद्धि के लिए एसएसपी को अधिक प्रभावी और किफायती विकल्प बताया है। राजस्थान कृषि विभाग ने भी इसी दिशा में किसानों को सिंगल सुपर फॉस्फेट और एनपीके ग्रेड उर्वरकों का उपयोग करने की सिफारिश की है, जो न केवल कम लागत पर उपलब्ध है बल्कि फसल उत्पादन में भी बढ़ोतरी का दावा किया गया है।


कुलपति प्रो. बलराज सिंह का कहना है कि किसान परंपरागत रूप से डीएपी और यूरिया का अधिक उपयोग करते हैं, जिससे मिट्टी में NPK (नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम) का संतुलन बिगड़ रहा है। SSP का विकल्प इस संतुलन को बनाए रखने में कारगर है। उन्होंने बताया कि डीएपी के एक बैग की कीमत में किसान SSP के तीन बैग खरीद सकते हैं, जो लागत में कमी के साथ-साथ बेहतर परिणाम भी देते हैं।


सिंगल सुपर फॉस्फेट में फास्फोरस (16%), सल्फर (11%), और कैल्शियम (19%) होते हैं, जो विशेष रूप से तिलहन फसलों के लिए अधिक फायदेमंद हैं। प्रो. बलराज सिंह ने बताया कि ये तत्व न केवल उपज और गुणवत्ता को बढ़ाते हैं, बल्कि तेल की मात्रा को भी बेहतर बनाते हैं, जिससे फसल का बाजार मूल्य बढ़ सकता है।


कुलपति ने बताया कि डीएपी की मांग और आयात पर निर्भरता बढ़ रही है, जबकि SSP का उत्पादन राजस्थान में ही किया जाता है, जिससे इसकी आपूर्ति में कोई कमी नहीं होती। राज्य सरकार भी किसानों से रबी सीजन में डीएपी की बजाय सिंगल सुपर फॉस्फेट के प्रयोग की अपील कर रही है।

खाद के उपयोग के लिए दिशानिर्देश

कृषि विभाग और विशेषज्ञों की सलाह है कि किसान इन नए तरीकों को अपनाकर फसल उत्पादन में सुधार करें और खेती में संतुलन बनाएं।

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