Site icon Agriculture| Kheti| Krishi| Farm| Farmer| Agriculture| News

अधिक मुनाफा कमाना चाहते हैं तो वैज्ञानिक विधि से करें हरी मिर्च की खेती

हरी मिर्च एक नकदी फसल है। इसकी व्यावसायिक खेती करके काफी अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। हरी मिर्च की खेती के साथ सबसे अच्छी बात है कि इसकी मांग पूरे साल बनी रहती है। बाज़ार में मिर्च के भाव में बहुत ज़्यादा उतार-चढ़ाव भी देखने को नहीं मिलता है। इसलिए आप मिर्च की खेती कर भावी मुनाफे का आप आसानी से अनुमान लगा सकते हैं। यदि आप बड़े स्तर पर मिर्च की खेती करना चाहते हैं तो आपको इसकी वैज्ञानिक तकनीक से खेती करनी चाहिए ताकि आपको फसल से अधिकतम पैदावार प्राप्त हो सके।

हरी मिर्च पर पाले का प्रकोप अधिक होता है इसलिए पाले की आंशका वाले क्षेत्रों में इसकी अगेती फसल लगाएँ। अधिक तापमान होने पर पौधों में फल नहीं बनते हैं और फूल व फल झड़ने लगते हैं। इसलिए मिर्च की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु और अच्छी भूमि का चुनाव करना बेहद ही महत्वपूर्ण है। मिर्च की फसल के लिये अधिक ठंड और गर्मी दोनों ही हानिकारक होती हैं। आपको अच्छी फसल प्राप्त हो सके इसके लिए उपजाऊ दोमट मिट्टी वाली ऐसी भूमि का चुनाव करें जिसमें पानी का अच्छा निकास हो सके। इस भूमि का पीएच मान 6 से 7.5 के बीच होना चाहिए। यदि भूमि के संबंध में आप इन बातों का ध्यान रखेंगे तो निश्चित तौर पर आपको अच्छी पैदावार प्राप्त होगी।

मिर्च की खेती के लिए सबसे पहले नर्सरी में बीजों की बुवाई कर पौध तैयार की जाती है। इसके बाद मिर्च की रोपाई वर्षा, शरद और ग्रीष्म तीनों मौसम में की जा सकती है। ध्यान रखें कि रोपाई के लिये पौध 25 से 35 दिनों से अधिक पुरानी नही होनी चाहिए। यानी नर्सरी में बीज की बुआई मुख्य खेत में रोपाई के 4 से 5 सप्ताह पहले अवश्य कर लें। बीज की बुआई के लिए आप मिर्च की कुछ उन्नत क़िस्मों जैसे – एन.पी. 46ए, पूसा ज्वाला, मथानिया लौंग, पन्त सी-1, जी 3, पंत सी-2, यलो वंडर, कैलिफोर्निया वंडर और बुलनोज आदि का चुनाव कर सकते हैं।

मिर्च की पौधशाला की तैयारी के समय 2 से 3 टोकरी वर्मीकंपोस्ट या फिर पूरी तरह से सड़ी गोबर खाद 50 ग्राम फोरेट दवा प्रति क्यारी की दर से मिट्टी में जररूर मिलाएँ। बुवाई के 1 दिन पूर्व कार्बन्डाजिम दवा 1.5 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से क्यारी को तर करें। यदि आप घरेलू बीज इस्तेमाल कर रहे हैं तो बीज को थायरम 2.5 ग्राम प्रति किलोग्राम की दर से बीज को ज़रूर उपचारित करें।

गर्मी में खेत की सिंचाई 5 से 7 दिन के अंतराल पर करें। बरसात में बारिश की मात्रा को देखते हुए आवश्यकतानुसार सिंचाई की जा सकती है। जहाँ तक बात है मिर्च की तुड़ाई की तो इसे फल लगने के 15-20 दिन बाद पौधों से तोड़ा जा सकता है। हाँ, एक तुड़ाई से दूसरे तुड़ाई के बीच 12 से 15 दिन का अन्तराल ज़रूर रखें। वैज्ञानिक विधि से खेती करने के बाद अनुकूल परिस्थियों में हरी मिर्च की सामान्य किस्मों से आप औसत उपज 125 से 250 क्विंटल और संकर किस्मों से आप 250 से 400 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज प्राप्त कर सकते हैं।

Exit mobile version