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बिहार : अधर में अन्नदाताओं का भविष्य

बिहार के तक़रीबन 36 जिले सूखे की चपेट में हैं। भारतीय मौसम विभाग की जानकारी के अनुसार चालू खरीफ सीजन में 1 जून से 25 जुलाई तक सूबे में सामान्य के मुकाबले 42 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। ऊपरवाले से बारिश की आस में जुड़े किसानों के दिल अब बैठने लगे हैं। ऐसा लगता है कि अनंत तक फैले आसमान ने किसानों को धोखा दे दिया है। बादल आये और उमड़-घुमड़ कर चले भी गए। न दरारों से निकल रही धरती की आँच ही कम हुई और ना ही भविष्य की सोच कर किसानों के माथे पर उभर आयीं लकीरें।

राज्य को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग हो रही है। मामले की गंभीरता राज्य विधानसभा से लेकर लोकसभा तक पहुँच चुकी है। राज्य में विपक्ष सूखे की स्थिति को लेकर आक्रामक है। और आक्रामकता के साथ ही सरकार पर आरोप है कि, वह सूखे की संभावित स्थिति से निपटने की तैयारियों के मोर्चे पर फेल है। विपक्ष ने सूखे से उपजी बदहाली का आरोप सीधे तौर पर सरकार के माथे मढ़ते हुए कहा है कि, सरकार ने अगर समय रहते स्थिति से निपटने की तैयारी की होती तो किसानों के सामने यह स्थिति नहीं आती।

विपक्ष के वार का विधानसभा में जवाब देते हुए प्रदेश के कृषि मंत्री प्रेम कुमार ने कहा कि सरकार सूखे की स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से चाकचौबंद है। साथ ही, स्थिति पर सरकार सजग निगरानी बनाए हुए है। कृषि मंत्री ने यह भी बताया कि, पिछले दो-तीन दिनों में मौसम का मिजाज कुछ बदला है और प्रदेश के कई जिलों में अच्छी बारिश हुई है। फिर भी, सूखे की स्थिति के हर मोर्चे से निपटने के लिए सरकार पूरी तरह से तैयार है। अगर 31 जुलाई तक बारिश नहीं हुई तो सरकार प्रदेश को सूखाग्रस्त भी घोषित कर देगी।

वर्तमान स्थिति के सम्बन्ध में प्रदेश सरकार प्रयासों के बारे में प्रेम कुमार ने कहा कि, प्रदेश सरकार किसानों को पहली बार डीजल पर प्रति लीटर 50 रुपये का अनुदान दे रही है जिसकी घोषणा पिछले दिनों की जा चुकी है। और अब तक कुल 20,082 आवेदन प्राप्त किये जा चुके हैं। सरकार व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए पूरी तरह से कटिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि, डीजल अनुदान की राशि 21 दिनों के भीतर लाभार्थी के खाते में भेज दी जाएगी। सरकार प्रदेश के किसानों को ले कर पूरी तरह से फिक्रमंद है।

उधर मामले की गूंज लोकसभा में भी सुनाई दी। कल, यानी बीते बुधवार को ही कांग्रेस के सांसद रंजीत रंजन ने लोकसभा में शून्यकाल के दौरान सूखे का मुद्दा उठाया। उन्होंने सूखे की स्थिति के मद्देनज़र राज्य को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की।

सूबे में सूखे को लेकर जो भी सियासी स्थिति बन रही हो, मगर एक बात तो साफ है कि सूखी धरती और किसानों के माथे पर पड़ी शिकन इस वक़्त एक दुसरे का सही हाल बयान कर रहे हैं। उनका भविष्य मौसम और सरकार के मिजाज के ठीक बीचोबीच अधर में लटका हुआ है।

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