पटना: बिहार सरकार ने राज्य में जल संसाधनों के संरक्षण और कृषि उत्पादकता में वृद्धि के लिए एक बड़ा निर्णय लिया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली को बढ़ावा देने हेतु 14066.66 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। यह कदम ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ के लक्ष्य की ओर एक महत्वपूर्ण प्रगति माना जा रहा है। इस अवसर पर बिहार के उप मुख्यमंत्री एवं कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार कृषि के क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दे रही है, जिससे किसानों को कम संसाधनों में अधिक लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत जल संरक्षण और सिंचाई दक्षता को लेकर बिहार सरकार पूरी गंभीरता से कार्य कर रही है।
सूक्ष्म सिंचाई पर विशेष जोर
ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों को अपनाने से खेतों में जल की बचत होती है और उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जाती है। कृषि मंत्री के अनुसार, ये तकनीकें परंपरागत सिंचाई पद्धतियों की तुलना में 60 प्रतिशत तक जल की बचत करती हैं और 25 से 35 प्रतिशत तक फसल उत्पादन बढ़ा सकती हैं।
लघु और सीमांत किसानों को मिलेगा अधिक लाभ
राज्य सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, इस योजना के तहत लघु और सीमांत किसानों को अधिक सब्सिडी दी जाएगी। ड्रिप सिंचाई प्रणाली पर लघु एवं सीमांत किसानों को कुल लागत का 80 प्रतिशत और अन्य किसानों को 70 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा। पोर्टेबल स्प्रिंकलर प्रणाली पर लघु एवं सीमांत किसानों को 55 प्रतिशत, जबकि अन्य किसानों को 45 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाएगी। व्यक्तिगत नलकूप या सबमर्सिबल पंप लगाने पर किसानों को अधिकतम ₹40,000 तक का अनुदान मिलेगा। तालाब या कुआं निर्माण के लिए ड्रिप सिस्टम अपनाने वाले किसानों को लागत का 50 प्रतिशत, अधिकतम ₹75,000 तक सहायता दी जाएगी।
प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम होंगे आयोजित
योजना को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार किसानों के बीच प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम भी चलाएगी। इन कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को सूक्ष्म सिंचाई की तकनीकी जानकारी दी जाएगी, ताकि वे नई पद्धतियों को आत्मसात कर सकें और जल प्रबंधन को लेकर सजग बनें।
जल प्रबंधन और आय वृद्धि की ओर ठोस पहल
उप मुख्यमंत्री सिन्हा ने कहा कि यह योजना सिर्फ सिंचाई सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि जल संसाधनों के टिकाऊ उपयोग, खेती की लागत में कमी, और किसानों की आय में बढ़ोतरी की दिशा में भी एक ठोस प्रयास है। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार का उद्देश्य अधिक से अधिक किसानों को इस योजना से जोड़ना और उन्हें आधुनिक, लाभकारी एवं पर्यावरण के अनुकूल कृषि प्रणाली अपनाने के लिए प्रेरित करना है। बिहार में कृषि क्षेत्र के सतत विकास और जल संरक्षण को लेकर यह निर्णय एक दूरदर्शी पहल है। इससे न केवल खेती की उत्पादकता बढ़ेगी, बल्कि राज्य की जल सुरक्षा और किसान सशक्तिकरण की दिशा में भी एक मजबूत आधार तैयार होगा। राज्य सरकार की इस पहल से लाखों किसानों को फायदा पहुंचने की उम्मीद है, जिससे बिहार की कृषि अर्थव्यवस्था को नया संबल मिल सकता है। यदि आप किसान हैं और इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं, तो अपने जिले के कृषि कार्यालय या कृषि समन्वयक से संपर्क करें।

