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पशुओं के लिए ये 8 चारे हैं पोषण से भरपूर, जानें फायदे

These 8 animal feeds are rich in nutrition

नई दिल्ली: पशुपालन में बेहतर आमदनी हासिल करने के लिए पशुओं का स्वस्थ रहना और उनका अच्छा दूध उत्पादन करना बेहद जरूरी है। इसके लिए पशुओं को केवल हरा चारा या सूखा भूसा खिलाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके आहार में प्रोटीन, ऊर्जा, फाइबर, खनिज और विटामिन का संतुलित होना भी जरूरी है। पशुओं को पौष्टिक आहार देने से उनकी सेहत बेहतर रहती है और दूध उत्पादन की क्षमता बनाए रखने में मदद मिलती है। किसान अपने खेतों में उगाए जाने वाले चारे के साथ कुछ वैकल्पिक पोषण स्रोतों को शामिल करके पशुओं का संतुलित आहार तैयार कर सकते हैं। पशुओं की आहार संबंधी जरूरत उनकी नस्ल, उम्र, वजन, दूध उत्पादन और शारीरिक अवस्था के अनुसार अलग-अलग होती है। इसलिए गाय, भैंस, बकरी और भेड़ को एक जैसी मात्रा में चारा देना सही नहीं है। हरे चारे, सूखे चारे और दाने का उचित अनुपात बनाए रखना जरूरी है।

पशुओं के लिए ये हैं पौष्टिक चारे के 8 विकल्प

पशुओं को नियमित रूप से अलग-अलग प्रकार के चारे खिलाने से उनके आहार में पोषक तत्वों की विविधता बनी रहती है। किसान अपनी जमीन, मौसम और स्थानीय उपलब्धता के अनुसार इन विकल्पों को अपना सकते हैं।

1. बरसीम और रिजका

बरसीम और रिजका पशुओं के लिए अच्छे दलहनी हरे चारे माने जाते हैं। इनमें प्रोटीन के साथ कैल्शियम और अन्य पोषक तत्व भी पाए जाते हैं। बरसीम सर्दियों में अच्छा उत्पादन देने वाली फसल है, जबकि रिजका कई क्षेत्रों में लंबे समय तक हरा चारा उपलब्ध करा सकता है। इन्हें गेहूं के भूसे या दूसरे सूखे चारे के साथ मिलाकर खिलाना बेहतर रहता है।

2. हाइब्रिड नेपियर घास

हाइब्रिड नेपियर पशुओं के लिए उपयोगी बहुवर्षीय चारा फसल है। इसकी खासियत है कि उचित सिंचाई और देखभाल से इससे बार-बार कटाई करके हरा चारा प्राप्त किया जा सकता है। इसमें रेशा अच्छी मात्रा में होता है। इसे छोटे टुकड़ों में काटकर पशुओं को खिलाना चाहिए। इसके साथ दलहनी चारा देने से आहार में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने में मदद मिलती है।

3. मक्का और ज्वार का हरा चारा

मक्का और ज्वार पशुओं के लिए ऊर्जा देने वाले महत्वपूर्ण हरे चारे हैं। मक्का का हरा चारा पाचन और ऊर्जा की जरूरत पूरी करने में उपयोगी होता है। वहीं, ज्वार भी कम लागत में हरा चारा उपलब्ध कराने का अच्छा विकल्प है। हालांकि, ज्वार को बहुत छोटी अवस्था में नहीं खिलाना चाहिए, क्योंकि कम उम्र की फसल में हाइड्रोसायनिक अम्ल बनने का खतरा रहता है। सूखे या पाले से प्रभावित ज्वार में भी सावधानी जरूरी है।

4. लोबिया और ग्वार

लोबिया और ग्वार दलहनी चारा फसलें हैं, जिनमें प्रोटीन की अच्छी मात्रा पाई जाती है। इन्हें मक्का, ज्वार और नेपियर जैसे गैर-दलहनी चारे के साथ मिलाकर खिलाया जा सकता है। इससे पशुओं के आहार में प्रोटीन और ऊर्जा का संतुलन बनाने में मदद मिलती है। किसान इन्हें खरीफ मौसम में हरे चारे के विकल्प के रूप में उगा सकते हैं।

5. अजोला

अजोला एक जलीय फर्न है, जिसका इस्तेमाल पशुओं के पूरक आहार के रूप में किया जा सकता है। इसमें प्रोटीन, खनिज और विटामिन पाए जाते हैं। किसान इसे छोटे तालाबों या विशेष टंकियों में उगा सकते हैं। पशुओं को खिलाने से पहले अजोला को साफ पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। इसे मुख्य चारे का विकल्प नहीं, बल्कि संतुलित आहार के अतिरिक्त पूरक के रूप में देना चाहिए।

6. मक्का का साइलेज

हरे मक्के को वैज्ञानिक तरीके से किण्वित करके साइलेज तैयार किया जाता है। इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है और हरे चारे की कमी के दौरान पशुओं को खिलाया जा सकता है। गर्मी के मौसम या सूखे की स्थिति में साइलेज पशुपालकों के लिए उपयोगी विकल्प साबित हो सकता है। हालांकि, साइलेज तैयार करते समय नमी और हवा का नियंत्रण जरूरी है, ताकि उसमें फफूंद न लगे।

7. गेहूं का भूसा और सूखी घास

गेहूं का भूसा और सूखी घास पशुओं के आहार में रेशे का प्रमुख स्रोत हैं। ये जुगाली और पाचन क्रिया को सामान्य बनाए रखने में मदद करते हैं। हालांकि, गेहूं के भूसे में प्रोटीन और ऊर्जा की मात्रा कम होती है। इसलिए केवल भूसा खिलाने से पशुओं की पोषण संबंधी जरूरतें पूरी नहीं होतीं। इसके साथ हरा चारा और संतुलित दाना देना जरूरी है।

8. सरसों, सोयाबीन और मूंगफली की खली

तेल निकालने के बाद बचने वाली सरसों, सोयाबीन और मूंगफली की खली पशुओं के लिए प्रोटीन का अच्छा स्रोत हो सकती है। इसे संतुलित दाना मिश्रण में शामिल किया जाता है। हालांकि, खली की मात्रा पशु की जरूरत और उसकी गुणवत्ता के अनुसार तय करनी चाहिए। फफूंद लगी या खराब गुणवत्ता वाली खली पशुओं को नहीं खिलानी चाहिए।

पशुओं को कितना हरा और सूखा चारा खिलाएं?

पशुओं को संतुलित आहार देने के लिए हरे चारे, सूखे चारे और दाने का उचित मिश्रण जरूरी है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के सामान्य मार्गदर्शन के अनुसार, एक वयस्क पशु को प्रतिदिन लगभग 15-20 किलोग्राम हरा चारा और 6 किलोग्राम सूखा चारा दिया जा सकता है। दलहनी और गैर-दलहनी हरे चारे को लगभग 1:3 के अनुपात में मिलाकर खिलाना भी उपयोगी माना जाता है। हालांकि, यह मात्रा सभी पशुओं के लिए समान नहीं है। अधिक दूध देने वाली गाय और भैंस को अतिरिक्त ऊर्जा और प्रोटीन की जरूरत होती है। वहीं, कम दूध देने वाले या दूध नहीं देने वाले पशुओं का आहार उनकी शारीरिक स्थिति के अनुसार तय किया जाना चाहिए।

पशुओं को चारा खिलाते समय इन बातों का रखें ध्यान

पशुपालकों को चारा खिलाने के दौरान कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए। हरे चारे को छोटे टुकड़ों में काटकर खिलाने से उसकी बर्बादी कम होती है। नए प्रकार के चारे को अचानक अधिक मात्रा में देने के बजाय धीरे-धीरे आहार में शामिल करना चाहिए। फफूंद लगा, सड़ा हुआ या बदबूदार चारा पशुओं को नहीं खिलाना चाहिए। इसके अलावा, पशुओं के लिए हर समय साफ और ताजा पानी उपलब्ध कराना जरूरी है। पशुओं के आहार में खनिज मिश्रण और नमक भी शामिल करना चाहिए। इससे कैल्शियम, फास्फोरस और अन्य जरूरी खनिज तत्वों की कमी दूर करने में मदद मिलती है। दुधारू पशुओं के लिए दाने की मात्रा दूध उत्पादन और शरीर के वजन के आधार पर निर्धारित करनी चाहिए।

संतुलित आहार से बेहतर हो सकती है पशुपालकों की आमदनी

पशुओं को पौष्टिक और संतुलित आहार देना पशुपालन की सफलता का महत्वपूर्ण आधार है। बरसीम, रिजका, नेपियर, मक्का, ज्वार, लोबिया और ग्वार जैसे चारे खेत में उगाकर पशुपालक चारे की लागत कम कर सकते हैं। वहीं, साइलेज और अजोला जैसे विकल्प चारे की उपलब्धता बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। सही मात्रा में हरा चारा, सूखा चारा और दाना देने से पशुओं की सेहत और दूध उत्पादन क्षमता को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है।

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