खेती-किसानी

खेत में सही समय पर गोबर की खाद डालना है ज़रूरी, जानिए फायदे

applying cow dung manure to the field

नई दिल्ली: खेती में अच्छी पैदावार हासिल करने के लिए केवल रासायनिक उर्वरकों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। मिट्टी की सेहत बनाए रखने और फसलों को लंबे समय तक पोषण देने में जैविक खाद की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। गोबर की खाद किसानों के लिए सबसे पुराने और उपयोगी जैविक खादों में से एक है। यह मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाती है, उसकी संरचना सुधारती है और पानी को रोककर रखने की क्षमता विकसित करने में मदद करती है। हालांकि, इसका पूरा लाभ तभी मिलता है, जब खाद अच्छी तरह सड़ी हुई हो और उसे सही समय पर खेत में डाला जाए। कई किसान खेत में ताजा गोबर डाल देते हैं, जबकि ऐसा करना हमेशा फायदेमंद नहीं होता। कच्चे गोबर में मौजूद गर्मी, अमोनिया और कुछ हानिकारक सूक्ष्मजीव फसल की शुरुआती बढ़वार को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए गोबर की खाद तैयार करने से लेकर खेत में मिलाने तक सही तरीका अपनाना जरूरी है।

गोबर की खाद डालने का सबसे अच्छा समय कौन-सा है?

गोबर की खाद डालने का सबसे अच्छा समय खेत की तैयारी के दौरान, बुवाई या रोपाई से कुछ सप्ताह पहले होता है। आमतौर पर खेत की जुताई के समय अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद डालकर मिट्टी में मिला देना चाहिए। इससे खाद को मिट्टी के साथ घुलने-मिलने और उसमें मौजूद पोषक तत्वों को उपलब्ध कराने का समय मिल जाता है। खरीफ फसलों के लिए खेत तैयार करते समय और रबी फसलों के लिए बुवाई से पहले गोबर की खाद डालना उपयोगी रहता है। सब्जियों, दलहनी फसलों और अन्य खेतिहर फसलों में भी इसे बुवाई या रोपाई से पहले खेत में मिलाया जा सकता है। बागवानी फसलों में खाद डालने का समय पौधे की उम्र, मौसम और स्थानीय कृषि सलाह के अनुसार तय करना चाहिए।

बारिश और सिंचाई का रखें ध्यान

गोबर की खाद डालते समय मौसम का ध्यान रखना भी जरूरी है। बहुत तेज बारिश की आशंका होने पर खाद खेत में नहीं डालनी चाहिए, क्योंकि बहाव के साथ इसके पोषक तत्व खेत से बाहर जा सकते हैं। खाद डालने के बाद हल्की सिंचाई या खेत में पर्याप्त नमी रहने से इसके मिट्टी में मिलने की प्रक्रिया बेहतर होती है। हालांकि, खेत में जलभराव नहीं होना चाहिए।

सड़ी हुई और कच्ची गोबर की खाद में क्या अंतर है?

खेत में हमेशा अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद डालना बेहतर माना जाता है। अच्छी खाद का रंग गहरा भूरा या काला होता है और उसमें से ताजा गोबर जैसी तेज गंध नहीं आती। इसका मूल रूप भी काफी हद तक बदल चुका होता है। इसके विपरीत, कच्चे गोबर में अपघटन की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई होती। इसे सीधे खेत में डालने से मिट्टी में अपघटन के दौरान नाइट्रोजन कुछ समय के लिए सूक्ष्मजीवों द्वारा इस्तेमाल की जा सकती है, जिससे फसल को शुरुआती अवस्था में नाइट्रोजन की कमी महसूस हो सकती है। इसके अलावा, कच्चे गोबर में खरपतवारों के बीज और हानिकारक सूक्ष्मजीव मौजूद रहने की आशंका भी होती है।

गोबर की खाद कितने समय में तैयार होती है?

गोबर की खाद तैयार करने के लिए पशुओं के गोबर के साथ उनका मूत्र, बिछावन में इस्तेमाल किया गया सूखा कचरा, भूसा और खेतों के जैविक अवशेष भी इकट्ठा करने चाहिए। इन सभी को गड्ढे में डालकर नमी बनाए रखें और ढक दें, ताकि पोषक तत्वों का नुकसान कम हो। सामान्य गड्ढा विधि में खाद लगभग चार से पांच महीने में तैयार हो सकती है। खाद को खुले में छोटे-छोटे ढेर बनाकर लंबे समय तक छोड़ने से पोषक तत्वों का नुकसान हो सकता है।

एक हेक्टेयर खेत में कितनी गोबर की खाद डालें?

सामान्य तौर पर अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद 10 से 20 टन प्रति हेक्टेयर की दर से इस्तेमाल की जाती है। यह मात्रा लगभग 4 से 8 टन प्रति एकड़ के बराबर है। हालांकि, वास्तविक मात्रा मिट्टी की उर्वरता, फसल, खाद की गुणवत्ता और उपलब्धता के अनुसार तय करनी चाहिए। सब्जियों और चारे वाली फसलों में जरूरत के अनुसार इससे अधिक मात्रा की सलाह भी दी जा सकती है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के कृषि संबंधी मार्गदर्शन में भी खेत की जरूरत के अनुसार गोबर की खाद के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है।

खेत में खाद डालने का सही तरीका

  • सबसे पहले खेत की जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा बना लें।
  • गोबर की खाद को पूरे खेत में समान रूप से फैलाएं।
  • खाद डालने के तुरंत बाद जुताई करके उसे मिट्टी में अच्छी तरह मिला दें।
  • खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखें, लेकिन जलभराव न होने दें।
  • खाद को लंबे समय तक खेत में खुले ढेर के रूप में न छोड़ें, क्योंकि इससे पोषक तत्वों का नुकसान हो सकता है।

यदि खाद पूरी तरह सड़ी हुई है तो इसे बुवाई से ठीक पहले भी मिट्टी में मिलाया जा सकता है। आंशिक रूप से सड़ी खाद को बुवाई से लगभग तीन से चार सप्ताह पहले डालना बेहतर है।

गोबर की खाद डालने से मिट्टी और फसल को मिलते हैं ये फायदे

गोबर की खाद केवल फसल को पोषण देने का काम नहीं करती, बल्कि मिट्टी की भौतिक और जैविक गुणवत्ता सुधारने में भी मदद करती है। इसके नियमित और संतुलित इस्तेमाल से मिट्टी में जैविक कार्बन बढ़ता है तथा उसकी संरचना बेहतर होती है। इससे कठोर मिट्टी भुरभुरी बनने में मदद मिलती है और जड़ों का विकास बेहतर हो सकता है।

पौधों को मिलते हैं जरूरी पोषक तत्व

अच्छी तरह सड़ी गोबर की खाद में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश के साथ कई सूक्ष्म पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं। हालांकि, इसमें पोषक तत्वों की मात्रा रासायनिक उर्वरकों की तुलना में कम होती है और वे धीरे-धीरे उपलब्ध होते हैं। इसलिए इसे रासायनिक उर्वरकों का पूरी तरह विकल्प मानने के बजाय संतुलित पोषण व्यवस्था का हिस्सा बनाना चाहिए।

मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की गतिविधि बढ़ती है

गोबर की खाद मिट्टी में लाभकारी सूक्ष्मजीवों के लिए जैविक पदार्थ उपलब्ध कराती है। इससे मिट्टी में जैविक गतिविधियां बढ़ने और पोषक तत्वों के चक्र को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। लंबे समय तक जैविक खाद का संतुलित इस्तेमाल मिट्टी की सेहत बनाए रखने में उपयोगी है।

गोबर की खाद इस्तेमाल करते समय इन बातों का रखें ध्यान

किसानों को ताजा गोबर सीधे बीज या पौधों की जड़ों के संपर्क में डालने से बचना चाहिए। खाद की गुणवत्ता और सड़ने की अवस्था की जांच करना जरूरी है। जरूरत से ज्यादा खाद डालने से मिट्टी में कुछ पोषक तत्वों और लवणों का असंतुलन भी हो सकता है। इसलिए मिट्टी की जांच और फसल की जरूरत के आधार पर खाद की मात्रा तय करें। इसके अलावा, गोबर की खाद डालने के बाद रासायनिक उर्वरकों की मात्रा भी मिट्टी परीक्षण और कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार निर्धारित करनी चाहिए। जैविक खाद और संतुलित रासायनिक उर्वरकों का उचित समन्वय फसल उत्पादन के साथ मिट्टी की दीर्घकालिक उर्वरता बनाए रखने में मदद कर सकता है। कुल मिलाकर, गोबर की खाद का सही समय पर और उचित मात्रा में इस्तेमाल किसानों के लिए फायदेमंद है। खेत की तैयारी के दौरान अच्छी तरह सड़ी खाद को मिट्टी में मिलाने से मिट्टी की संरचना, जलधारण क्षमता और जैविक गतिविधियों में सुधार हो सकता है। इससे फसल की बेहतर बढ़वार और लंबे समय तक खेत की उर्वरता बनाए रखने में मदद मिलती है।

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