लखनऊ: उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए दिवाली से पहले अच्छी खबर सामने आई है। प्रदेश में गन्ना पेराई सत्र 2026-27 की शुरुआत हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अब तक प्रदेश की 9 चीनी मिलों ने पेराई शुरू कर दी है, जबकि 33 चीनी मिलों ने गन्ना खरीद की प्रक्रिया आगे बढ़ाते हुए इंडेंट जारी किया है। इनमें से 24 मिलों का दिवाली से पहले पेराई शुरू करने का कार्यक्रम प्रस्तावित है। इससे गन्ना किसानों को अपनी उपज चीनी मिलों तक पहुंचाने का रास्ता साफ हो गया है। गन्ना विकास विभाग के अनुसार, प्रदेश में संचालित 9 चीनी मिलों में एक सहकारी क्षेत्र और आठ निजी क्षेत्र की हैं। क्षेत्रवार देखें तो सहारनपुर परिक्षेत्र की तीन, मेरठ परिक्षेत्र की एक, मुरादाबाद परिक्षेत्र की दो और लखनऊ परिक्षेत्र की तीन चीनी मिलों में पेराई शुरू हो चुकी है।
24 चीनी मिलों ने गन्ना खरीद के लिए जारी किया इंडेंट
प्रदेश की अन्य चीनी मिलों ने भी पेराई सत्र शुरू करने की तैयारियां पूरी कर ली हैं। विभाग के मुताबिक, 24 चीनी मिलों ने गन्ना खरीद के लिए इंडेंट जारी कर दिया है। इन मिलों में दिवाली से पहले पेराई शुरू होने की संभावना है, जबकि शेष चीनी मिलें त्योहार के बाद अपना संचालन शुरू करेंगी। गन्ना विकास विभाग ने सभी चीनी मिलों को निर्देश दिया है कि वे अपने आवंटित गन्ना क्रय केंद्रों पर जरूरी व्यवस्थाएं तत्काल पूरी करें। किसानों से गन्ने की खरीद समय पर हो और पेराई कार्य निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार संचालित हो, इसके लिए तैयारियों में देरी नहीं करने को कहा गया है।
47 लाख से अधिक किसान बेचते हैं चीनी मिलों को गन्ना
उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में शामिल है। प्रदेश में 47 लाख से अधिक गन्ना किसान अपनी उपज चीनी मिलों को बेचते हैं। गन्ना विभाग के अनुसार, चालू पेराई सत्र के लिए राज्य में लगभग 28.14 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती की गई है। ऐसे में चीनी मिलों का समय पर संचालन लाखों किसानों की आमदनी और भुगतान व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण है। पेराई सत्र शुरू होने से किसानों को अपनी फसल बेचने में सुविधा मिलेगी। साथ ही, समय पर गन्ना खरीद होने से खेतों में खड़ी फसल की कटाई और अगली फसल की तैयारी करने में भी मदद मिलेगी।
गन्ने का भाव 100 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाने की मांग
एक ओर प्रदेश में पेराई सत्र शुरू हो रहा है, वहीं दूसरी ओर गन्ना किसान इस साल गन्ने के दाम में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। किसान संगठनों का कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। खाद, बीज, सिंचाई, कृषि कार्यों और मजदूरी पर खर्च बढ़ने के कारण गन्ने की खेती पहले के मुकाबले महंगी हो गई है। ऐसे में मौजूदा कीमत पर किसानों को पर्याप्त लाभ नहीं मिल पा रहा है। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने गन्ने के मूल्य में कम से कम 100 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि गन्ना उत्पादन की लागत 400 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक हो चुकी है। इसलिए किसानों को उचित लाभ देने के लिए गन्ने का भाव बढ़ाकर 500 रुपये प्रति क्विंटल किया जाना चाहिए।
अब योगी सरकार के फैसले पर किसानों की नजर
गन्ने की कीमत में बढ़ोतरी की मांग के बीच किसानों की नजर अब राज्य सरकार के फैसले पर है। पेराई सत्र शुरू होने के साथ ही गन्ना मूल्य का मुद्दा भी महत्वपूर्ण हो गया है। किसान संगठनों का तर्क है कि उत्पादन लागत और खेती में बढ़ते खर्च को देखते हुए गन्ने का उचित मूल्य तय किया जाना चाहिए। फिलहाल, प्रदेश की 9 चीनी मिलों में पेराई शुरू हो चुकी है और अन्य मिलों के भी जल्द संचालन में आने की तैयारी है। ऐसे में किसानों को उम्मीद है कि सरकार पेराई सत्र के दौरान गन्ना मूल्य को लेकर भी जल्द निर्णय लेगी।
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