नई दिल्ली: भारत का मखाना अब केवल मिथिला और बिहार के स्थानीय बाजारों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि दुनिया के कई देशों में इसकी मांग तेजी से बढ़ी है। पिछले कुछ वर्षों में मखाने के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अमेरिका, कनाडा, संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भारतीय मखाने की मांग बढ़ी है। हालांकि, वर्ष 2025-26 में निर्यात में अचानक गिरावट आने से मखाना कारोबारियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020 में भारत ने करीब 6,700 टन मखाने का निर्यात किया था। वर्ष 2024 तक यह मात्रा बढ़कर 25,130 टन तक पहुंच गई। इस दौरान अमेरिका भारतीय मखाने का सबसे बड़ा खरीदार रहा, जिसकी हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत बताई गई। कनाडा की हिस्सेदारी करीब 20 प्रतिशत और संयुक्त अरब अमीरात की करीब 17 प्रतिशत रही।
2025-26 में मखाना निर्यात को लगा बड़ा झटका
मखाने के निर्यात में तेजी का दौर वर्ष 2025 में कमजोर पड़ गया। अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के दौरान करीब 7,626 टन मखाने का ही निर्यात हो पाया। यह पिछले वर्ष के मुकाबले बड़ी गिरावट को दर्शाता है।
अमेरिका की नीतियों और कीमतों के दबाव का असर
मखाना निर्यात में गिरावट के पीछे अमेरिका की ओर से लगाए गए शुल्क और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर बढ़े दबाव को प्रमुख कारण माना जा रहा है। अमेरिका भारतीय मखाने का सबसे बड़ा खरीदार रहा है, इसलिए वहां मांग प्रभावित होने का सीधा असर भारतीय निर्यातकों पर पड़ा। निर्यात कीमतों में भी उल्लेखनीय गिरावट आई। मई 2025 में मखाने की निर्यात कीमत करीब 20.3 डॉलर प्रति किलोग्राम थी, जो अगस्त 2025 तक घटकर करीब 15.5 डॉलर प्रति किलोग्राम रह गई। कीमतों में इस गिरावट ने निर्यात कारोबारियों के सामने लाभ बनाए रखने की चुनौती बढ़ा दी।
घरेलू बाजार ने मखाना कारोबार को संभाला
विदेशी बाजार में निर्यात घटने के बावजूद भारत का घरेलू बाजार मखाना कारोबार के लिए मजबूत सहारा बना हुआ है। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण मखाने को पौष्टिक और प्रीमियम नाश्ते के रूप में पसंद किया जा रहा है।
2025 में 1,250 रुपये किलो तक पहुंची कीमत
देश में मखाने की कीमत वर्ष 2020 में करीब 500 रुपये प्रति किलोग्राम थी। वर्ष 2025 में यह बढ़कर करीब 1,250 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। घरेलू मांग बढ़ने का असर मखाने के बाजार के आकार पर भी पड़ा है। वर्ष 2021-22 में भारत का मखाना बाजार करीब 5,000 से 5,500 करोड़ रुपये का था, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर करीब 8,000 से 8,500 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। मजबूत घरेलू मांग ने निर्यात में आई गिरावट से किसानों और कारोबारियों को काफी हद तक राहत दी।
अब मखाना कारोबार के सामने सबसे बड़ी चुनौती
मखाने की बढ़ती मांग और कीमतों के बीच अब इसके सुरक्षित भंडारण पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। मखाना नमी और खराब भंडारण परिस्थितियों से जल्दी प्रभावित होने वाला उत्पाद है। इसलिए इसकी गुणवत्ता बनाए रखने के लिए वैज्ञानिक तरीके से भंडारण जरूरी है। मखाना क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि गोदाम केवल उत्पाद रखने की जगह नहीं है, बल्कि यह पूरे कारोबार की गुणवत्ता और लाभ को प्रभावित करता है। गलत तरीके से भंडारण करने पर महंगा मखाना खराब हो सकता है और कारोबारियों को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
नमी और गंदगी से खराब हो सकता है मखाना
गोदाम में मौजूद नमी मखाने की सबसे बड़ी दुश्मन है। मखाना वातावरण से नमी तेजी से सोख सकता है। इससे उसका कुरकुरापन खत्म होकर वह नरम हो सकता है और स्वाद तथा गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा चूहे, कीड़े-मकोड़े, धूल और गंदगी भी मखाने को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए भंडारगृह को सूखा, साफ और पर्याप्त हवा वाला रखना बेहद जरूरी है।
मखाने के भंडारण में इन बातों का रखें ध्यान
मखाने की बोरियों को सीधे जमीन पर रखने के बजाय लकड़ी के पट्टों के ऊपर रखना चाहिए। इससे फर्श की नमी बोरियों तक पहुंचने की संभावना कम होती है। भंडारण के दौरान पुराने और नए माल का सही प्रबंधन भी जरूरी है। इसके लिए पहले आया माल पहले बाजार में भेजने के नियम का पालन करना चाहिए। इससे लंबे समय तक रखा पुराना मखाना खराब होने से बचाया जा सकता है।
आधुनिक तकनीक से बेहतर होगा भंडारण
मखाना कारोबार में तापमान और नमी की लगातार निगरानी करने वाले उपकरणों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा डिजिटल भंडार प्रबंधन व्यवस्था अपनाने से माल की मात्रा, गुणवत्ता और भंडारण अवधि पर नजर रखना आसान होगा। इससे कारोबारियों को समय रहते नमी या तापमान में होने वाले बदलाव की जानकारी मिल सकती है और खराब होने से पहले जरूरी कदम उठाए जा सकते हैं।
नए विदेशी बाजार तलाशना जरूरी
भारतीय मखाने के निर्यात को मजबूत बनाए रखने के लिए किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता कम करना जरूरी है। अमेरिका के अलावा यूरोप, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया जैसे बाजारों में भारतीय मखाने की पहुंच बढ़ाने की संभावनाएं तलाशनी होंगी।
घरेलू और विदेशी बाजार दोनों पर ध्यान जरूरी
त्योहारों और व्रत के मौसम में घरेलू बाजार में मखाने की मांग तेजी से बढ़ती है। ऐसे समय में पर्याप्त भंडार बनाए रखना कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण होगा। वहीं, विदेशी बाजारों में निर्यात बढ़ाने के लिए गुणवत्ता, पैकेजिंग और सुरक्षित भंडारण के मानकों पर विशेष ध्यान देना होगा। भारत के पास मखाना उत्पादन और कारोबार में बड़ी संभावनाएं हैं। यदि निर्यात बाजारों में विविधता लाई जाए, घरेलू मांग का बेहतर इस्तेमाल किया जाए और भंडारण की वैज्ञानिक व्यवस्था मजबूत की जाए, तो मखाना किसानों और कारोबारियों के लिए आने वाले वर्षों में और बड़ा आर्थिक अवसर बन सकता है।
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