नई दिल्ली: बरसात के मौसम के खत्म होते ही धान की फसल की देखभाल किसानों के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता बन जाती है। बारिश के बाद खेतों में पानी भरना, खरपतवार का तेजी से बढ़ना और कीट-रोगों का फैलना एक आम समस्या है, जो समय पर ध्यान न देने पर फसल की पैदावार को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। ऐसे में सही समय पर कुछ आसान और प्रभावी कदम उठाकर किसान न केवल अपनी फसल को बचा सकते हैं, बल्कि उपज में भी बढ़ोतरी कर सकते हैं। रामपुर के जिला कृषि अधिकारी कुलदीप सिंह राणा ने किसानों को ऐसे ही पांच कारगर उपाय बताए हैं, जिन्हें अपनाकर खेती को ज्यादा सुरक्षित और लाभकारी बनाया जा सकता है।
राणा के अनुसार, बारिश के बाद सबसे पहले खेत में पानी के जमाव को रोकना जरूरी है। लंबे समय तक पानी भरने से पौधों की जड़ों को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और पौधों की वृद्धि रुक जाती है। इसके लिए खेत की नालियां हमेशा साफ रखनी चाहिए, ताकि अतिरिक्त पानी आसानी से निकल सके। अगर पानी ज्यादा देर तक ठहरा रहेगा, तो कीट और रोग तेजी से फैल सकते हैं। बरसात के बाद खरपतवार का तेजी से फैलना भी एक गंभीर समस्या है। खरपतवार फसल के पोषण को छीन लेते हैं और धान की बढ़वार को रोक देते हैं। हर 20 से 25 दिन में खेत से खरपतवार हटाने की सलाह दी जाती है, ताकि पौधे स्वस्थ और मजबूत रह सकें।
धान की फसल को हरा-भरा और ताकतवर बनाए रखने के लिए बारिश के बाद हल्का खाद देना भी जरूरी है। कृषि विशेषज्ञ प्रति बीघा खेत में 5 से 7 किलो जिंक सल्फेट और 15 से 20 किलो यूरिया डालने की सलाह देते हैं। इससे पौधों की मजबूती बढ़ती है और वे कीट तथा रोगों का बेहतर सामना कर पाते हैं। बारिश के बाद तना छेदक, पत्ता लपेटक जैसे कीट और झुलसा रोग का खतरा बढ़ जाता है। समय रहते सही दवा का छिड़काव करना बेहद जरूरी है। किसान अपने नजदीकी कृषि केंद्र से सलाह लेकर हल्के पानी में दवा का घोल तैयार करें और पूरे खेत में समान रूप से छिड़काव करें, ताकि फसल सुरक्षित रहे।
धान के पौधों को हमेशा नमी की जरूरत होती है, लेकिन पानी की मात्रा नियंत्रित रहनी चाहिए। बारिश के बाद खेत में 2 से 3 सेंटीमीटर पानी बनाए रखना सबसे उपयुक्त माना जाता है। इससे जड़ों को पर्याप्त नमी मिलती है और अनाज भरने की प्रक्रिया बेहतर होती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि बरसात के बाद इन आसान और कम खर्चीले उपायों को अपनाने से किसान अपनी मेहनत का पूरा फल पा सकते हैं। समय पर देखभाल न केवल फसल को सुरक्षित रखती है, बल्कि उपज और बाजार में मिलने वाली कीमत दोनों में बढ़ोतरी करती है। यही वजह है कि मौसम के अनुसार खेती में लचीलापन और सावधानी, बेहतर उत्पादन की कुंजी मानी जाती है।

