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बिहार में कृषि की ऐतिहासिक छलांग: 20 साल में रेकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन

बिहार में 20 साल में रेकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन

पटना: बिहार और कृषि हमेशा से एक-दूसरे के पर्याय रहे हैं। समय के साथ राज्य ने आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाया है और उत्पादन के आंकड़े यह साबित करते हैं कि बिहार ने खाद्यान्न उत्पादन में ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। वर्ष 2004-05 से लेकर 2023-24 तक बिहार का कुल खाद्यान्न उत्पादन 231.15 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया है। यह 152.09 लाख मीट्रिक टन की वृद्धि है, यानी 192.37 प्रतिशत की उल्लेखनीय छलांग। ऐसे में यह पिछले 20 साल में रेकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन है।

उत्पादकता में जबरदस्त सुधार

सिर्फ उत्पादन ही नहीं, बल्कि प्रति हेक्टेयर उत्पादकता में भी बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2004-05 में बिहार की औसत उत्पादकता 12.11 क्विंटल प्रति हेक्टेयर थी, जो अब 33.86 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंच चुकी है। यह 179.06 प्रतिशत की वृद्धि है, जो कृषि क्षेत्र की प्रगति का बड़ा संकेत है।

मक्का उत्पादन में बूम, इथेनॉल नीति का असर

बिहार में मक्का उत्पादन ने नई ऊंचाइयों को छुआ है। 2004-05 में जहां मक्का का उत्पादन 14.91 लाख मीट्रिक टन था, वहीं 2023-24 में यह बढ़कर 58.65 लाख मीट्रिक टन हो गया है। यानी मक्का उत्पादन में 293 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

प्रति हेक्टेयर उत्पादकता भी 23.79 क्विंटल से बढ़कर 61.38 क्विंटल तक पहुंच चुकी है। राज्य में स्थापित 17 इथेनॉल इकाइयों ने मक्का की मांग और रकबा दोनों को बढ़ावा दिया है। इसी कारण मक्का का क्षेत्रफल अब 9.55 लाख हेक्टेयर तक पहुंच चुका है।

धान और चावल का उत्पादन चार गुना

धान और चावल में भी बेमिसाल वृद्धि हुई है। वर्ष 2004-05 में चावल का उत्पादन 26.25 लाख मीट्रिक टन था, जो अब बढ़कर 95.23 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया है। यानी 262.78 प्रतिशत की वृद्धि। प्रति हेक्टेयर उत्पादकता भी 14.15 क्विंटल से बढ़कर 30.62 क्विंटल हो गई है, जो 116.40 प्रतिशत की बढ़त है।

गेहूं का उत्पादन दोगुना, लेकिन चुनौतियां बरकरार

गेहूं के उत्पादन में भी अच्छी वृद्धि हुई है। 2004-05 में गेहूं का उत्पादन 32.79 लाख मीट्रिक टन था, जो अब बढ़कर 73.07 लाख मीट्रिक टन हो चुका है। यह 122.84 प्रतिशत की वृद्धि है। प्रति हेक्टेयर उत्पादकता 16.22 क्विंटल से बढ़कर 32.11 क्विंटल हो गई है, यानी करीब 98 प्रतिशत की बढ़ोतरी।

किसानों की स्थिति अब भी अधूरी

हालांकि बिहार ने खाद्यान्न उत्पादन और उत्पादकता में ऐतिहासिक सफलता हासिल की है, लेकिन चिंता की बात यह है कि इसका लाभ सीधे किसानों तक नहीं पहुंच पाया है। विशेषज्ञों का कहना है कि उत्पादन बढ़ने के बावजूद किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। इस वजह से किसानों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।

बिहार कृषि के लिए क्या है आगे की राह

कृषि उत्पादन में इस ऐतिहासिक उछाल ने बिहार को खाद्यान्न के मामले में मजबूत बनाया है। लेकिन किसानों की वास्तविक आय और जीवन स्तर में सुधार के लिए बाजार व्यवस्था, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की प्रभावी उपलब्धता और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है। तभी राज्य में कृषि विकास का लाभ किसानों तक पहुंच सकेगा।

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