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व्यावसायिक स्तर पर ऐसे शुरू करें शिमला मिर्च की खेती

नई दिल्ली: शिमला मिर्च एक लोकप्रिय सब्जी है जो दुनिया भर में उगाई जाती है। यह अपनी मीठी व तीखी स्वाद और विविध पौष्टिक गुणों के लिए जानी जाती है। शिमला मिर्च की खेती भारत में बड़े पैमाने पर की जाती है। इस सब्जी की खेती किसानों को काफी अच्छा मुनाफा प्रदान करती है। इसकी खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता होती है। खेती की तैयारी के दौरान बीजों की बुवाई से पहले खेत की अच्छी तरह से जुताई कर लें। इस समय खेत में 10 टन प्रति हेक्टेयर गोबर की खाद या कम्पोस्ट मिला दें।

बुवाई से पहले शिमला मिर्च के बीज को 10 से 15 डिग्री सेल्सियस तापमान में अंकुरित किया जा सकता है। बीज को 2 से 3 सेंटीमीटर की गहराई में बोएं। बीज को बोने के बाद, बीज को हल्की मिट्टी से ढक दें और हल्की सिंचाई कर दें। बीज से पौधे तैयार होने के बाद, पौधों की रोपाई करें। रोपाई के लिए 20 से 25 सेंटीमीटर की दूरी पर गड्ढे बनाएं। प्रत्येक गड्ढे में एक पौधा लगाएं। रोपाई के बाद, पौधों को हल्की सिंचाई कर दें। शिमला मिर्च की फसल को नियमित रूप से सिंचाई की आवश्यकता होती है। गर्मियों में हफ्ते में दो बार और सर्दियों में हफ्ते में एक बार सिंचाई करें।

शिमला मिर्च की फसल को अच्छी पैदावार देने के लिए खाद और उर्वरक की ज़रूरत होती है। रोपाई के बाद 10 किलोग्राम नाइट्रोजन, 5 किलोग्राम फास्फोरस और 5 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से दें। फसल के विकास के दौरान 20 किलोग्राम नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर की दर से दे सकते हैं। इस फसल में खरपतवार नियंत्रण करना आवश्यक है। खरपतवार नियंत्रण के लिए निराई-गुड़ाई करें या खरपतवारनाशक का प्रयोग करें।

शिमला मिर्च की फसल में कई तरह के कीट और रोग लग सकते हैं। कीट और रोग नियंत्रण के लिए समय-समय पर फसल की निगरानी करें। कीट और रोगों के प्रकोप के लक्षणों को देखते ही तुरंत उचित उपचार करें। शिमला मिर्च की फसल 60 से 70 दिनों में तैयार हो जाती है। फसल कटाई के लिए मिर्च को हरी या पकी हुई स्थिति में कटाई कर सकते हैं। हरी मिर्च को कटाई के बाद तुरंत बाजार में बेच दें। पकी हुई मिर्च को कटाई के बाद थोड़ी देर तक धूप में सुखा दें।

शिमला मिर्च की फसल से प्रति हेक्टेयर 10 से 15 टन तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। शिमला मिर्च की खेती से कई लाभ मिल सकते हैं, मसलन: यह एक व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण फसल है। इसकी खेती में कम लागत आती है।

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